दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में शुमार रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब किसी दूसरे देश की धरती पर कदम रखते हैं, तो उनके साथ सिर्फ कूटनीति नहीं बल्कि एक पूरा सुरक्षा तंत्र भी चलता है। 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन 11 सितंबर को दिल्ली पहुंच चुके हैं। इस दौरान भारत और रूस की सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर उनकी सुरक्षा के लिए कड़ा सुरक्षा घेरा तैयार किया है। पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में उनके निजी सुरक्षाकर्मियों से लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां, स्नाइपर, ड्रोन निगरानी और हाईटेक सुरक्षा उपकरण तक शामिल होते हैं।

पुतिन की सुरक्षा का पहला घेरा, SBP और FSO

dossier.center के मुताबिक, रूस में राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रेसिडेंशियल सिक्योरिटी सर्विस यानी SBP की है। यह एजेंसी Federal Protective Service यानी FSO के तहत काम करती है। इसका गठन सोवियत दौर की खुफिया एजेंसी KGB से हुआ था, जहां खुद पुतिन भी एजेंट रह चुके हैं।

दावे के मुताबिक, FSO में करीब 50 हजार लोग काम करते हैं। पुतिन के बेहद करीब हमेशा हथियारबंद सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। उनके आसपास मौजूद लोगों के बीच भी FSO के एजेंट अलग-अलग भूमिकाओं में मौजूद हो सकते हैं।

SBP के सुरक्षाकर्मी काले सूट और ईयरफोन के साथ पुतिन के बेहद करीब रहते हैं। इनकी चयन प्रक्रिया भी बेहद कठिन बताई जाती है। उम्मीदवार की शारीरिक फिटनेस, निशानेबाजी, मानसिक मजबूती, विदेशी भाषा के ज्ञान के साथ बैकग्राउंड चेक और लॉयल्टी टेस्ट जैसी प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया है।

चार सर्कल में बंटी सुरक्षा व्यवस्था

यूरोपियन इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश यात्रा के दौरान पुतिन की सुरक्षा को चार अलग-अलग सर्कल में बांटा जाता है।

सर्कल-1: इसमें पुतिन के पर्सनल बॉडीगार्ड शामिल होते हैं, जो उनके बिल्कुल करीब रहते हैं।

सर्कल-2: यह बेहद गोपनीय सुरक्षा परत होती है। इसमें एजेंट आम लोगों के बीच मौजूद रहकर निगरानी रखते हैं।

सर्कल-3: इस परत का काम बाहरी लोगों को पुतिन के करीब पहुंचने से रोकना और पूरे इलाके को नियंत्रित करना होता है।

सर्कल-4: यह सबसे बाहरी सुरक्षा परत होती है, जिसमें ऊंची इमारतों पर स्नाइपर तैनात किए जाने की बात कही गई है।

इसके अलावा पुतिन के काफिले में कई गाड़ियां, बाइक राइडर्स और ट्रक शामिल होते हैं। संभावित ड्रोन हमलों से बचाव के लिए ड्रोन को ब्लॉक करने की व्यवस्था भी की जाती है।

भारत में सुरक्षा का मजबूत कवच

पुतिन की भारत यात्रा के दौरान सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। भारत और रूस की एजेंसियों ने मिलकर कई स्तरों वाला सुरक्षा घेरा तैयार किया है, जो उनके विमान के दिल्ली पहुंचने के साथ ही सक्रिय हो जाता है।

सबसे अंदरूनी परत में रूस के SBP अधिकारी होते हैं। इसके बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती होती है। NSG कमांडो आतंकवादी हमलों से निपटने के लिए तैयार रहते हैं, जबकि दिल्ली पुलिस रूट और आसपास के इलाके की सुरक्षा संभालती है।

तकनीकी निगरानी के लिए ड्रोन, जैमर, AI मॉनिटरिंग और फेशियल रिकग्निशन सिस्टम का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। पुतिन के काफिले के रास्ते में ऊंची इमारतों पर स्नाइपर टीमों की तैनाती भी की जाती है।

सूत्रों के मुताबिक, पुतिन के दौरे से पहले रूस से चार दर्जन से ज्यादा सुरक्षाकर्मी दिल्ली पहुंचे थे। इन सुरक्षाकर्मियों ने दिल्ली पुलिस और NSG के साथ मिलकर रूट को सैनिटाइज किया।

‘रोलिंग बंकर’ और ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’

यूरोपियन इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन की जमीनी सुरक्षा में उनकी कार बेहद अहम भूमिका निभाती है। इसे ‘रोलिंग बंकर’ कहा जाता है। यह Aurus Senat मॉडल की बुलेटप्रूफ और बमप्रूफ लिमोसिन है, जिसे खास तौर पर पुतिन के लिए तैयार किया गया है।

इसमें इमरजेंसी ऑक्सीजन, रन-फ्लैट टायर, सुरक्षित संचार प्रणाली और कई एग्जिट का इंतजाम बताया जाता है। एयर फिल्टर सिस्टम को केमिकल और बायोलॉजिकल हमलों से बचाव के लिए भी डिजाइन किए जाने की बात कही गई है।

हवाई यात्रा के दौरान पुतिन आमतौर पर Ilyushin IL-96-300PU विमान से सफर करते हैं। रूसी मीडिया में इसे ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ कहा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान में मिसाइल-डिफेंस काउंटरमेजर्स, एन्क्रिप्टेड कॉन्फ्रेंस रूम और कमांड सिस्टम मौजूद हैं।

पुतिन के साथ बैकअप विमान भी उड़ाए जाने की बात कही गई है, ताकि यह पता लगाना मुश्किल हो कि वह किस विमान में सफर कर रहे हैं।

खाना-पानी से लेकर ‘यूरिन ब्रीफकेस’ तक सुरक्षा

dossier.center के मुताबिक, पुतिन की सुरक्षा सिर्फ उनके आसपास तैनात सुरक्षाकर्मियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके खाने-पीने और स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं तक भी जाती है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पुतिन का खाना होटल की रसोई में तैयार नहीं होता, बल्कि उनके साथ आए रूसी शेफ इसे तैयार करते हैं। खाना बनाने वालों के लिए दस्ताने पहनने, वर्दी बदलने और हाथों पर किसी तरह के कट की जांच जैसी प्रक्रियाओं का उल्लेख किया गया है।

खाने की सामग्री की जांच किए जाने और भोजन को पुतिन तक पहुंचने से पहले बॉडीगार्ड द्वारा चखे जाने का भी दावा किया गया है।

सबसे असामान्य दावों में से एक उनके मल-मूत्र से जुड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश यात्रा के दौरान पुतिन के मल-मूत्र को एक विशेष ब्रीफकेस में रखकर रूस वापस ले जाया जाता है, ताकि कोई विदेशी एजेंसी उसकी जांच करके उनकी सेहत से जुड़ी जानकारी हासिल न कर सके।

‘चेगेट’ न्यूक्लियर ब्रीफकेस

पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था में न्यूक्लियर ब्रीफकेस का भी जिक्र किया जाता है। इसे ‘चेगेट’ कहा जाता है। दावा है कि यह ब्रीफकेस पुतिन के करीब रखा जाता है और परमाणु हमले से जुड़े आदेश देने की व्यवस्था का हिस्सा है।

‘मस्केटियर्स’ की खास टीम

dossier.center के मुताबिक, पुतिन की सुरक्षा टीम के सदस्य खुद को ‘मस्केटियर्स’ कहते हैं। ये FSO की विशेष यूनिट के कमांडो होते हैं, जो पुतिन के साथ साये की तरह रहते हैं।

इस सुरक्षा नेटवर्क में स्नाइपर, ड्रोन ऑपरेटर, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस विशेषज्ञ और संचार इकाइयां भी शामिल होने की बात कही गई है।

यूक्रेन युद्ध के बाद और बढ़ाई गई सुरक्षा

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पुतिन की सुरक्षा में लगातार इजाफा किया गया है। सितंबर 2026 में पुतिन ने FSO के केंद्रीय तंत्र को बढ़ाने के लिए एक डिक्री पर हस्ताक्षर किए। रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद यह चौथा विस्तार है।

FSO के केंद्रीय तंत्र में अब 812 लोगों के होने की बात कही गई है। इसका मुख्य काम राष्ट्रपति, उनके परिवार और प्रधानमंत्री की सुरक्षा करना है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पुतिन के आसपास काम करने वाले कर्मचारियों को सेल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती। उन्हें मास्क पहनना होता है और पुतिन से मिलने से पहले अपनी कलाई घड़ी तक उतारनी होती है।

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