पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से एक हैरान करने वाली और सनसनीखेज कहानी सामने आई है। यहाँ कभी सिर पर टोकरी रखकर ट्रकों में पत्थर लादने और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने वाले दिहाड़ी मजदूर टुल्लू मंडल उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन मंडल की किस्मत ऐसी पलटी कि आज वह ‘पत्थर सम्राट’ और ‘पत्थर माफिया’ के रूप में चर्चित हो चुका है। हाल ही में उसके रिश्तेदार मीनार मंडल के घर से 28.50 करोड़ रुपये नकद और 15 किलो सोना बरामद होने के बाद टुल्लू मंडल का पूरा कारोबारी साम्राज्य एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है।

साल 2000 के दौर में टुल्लू मोहम्मदबाजार के पत्थर खदान क्षेत्र में एक साधारण मजदूर के रूप में काम करता था। परिवार का गुजारा चलाने के लिए वह शाम को बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाता था। धीरे-धीरे उसने ट्रक चालकों से समझौता कर पत्थर लोडिंग का ठेका लेना शुरू किया और अपनी पहली कमाई से पुराने ट्रक खरीदकर ढुलाई का कारोबार शुरू किया। उसकी जिंदगी में बड़ा मोड़ साल 2016 के बाद आया, जब पत्थर खदानों में डुप्लीकेट कार्बन रिसीट (DCR) व्यवस्था लागू हुई।

राजनीतिक नजदीकियों और टोलगेट संचालन से चमकी किस्मत

स्थानीय लोगों और जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित तौर पर तत्कालीन सत्तारूढ़ दल के प्रभावशाली नेता अनुब्रत मंडल से नजदीकियों के चलते टुल्लू को सात टोलगेटों के संचालन की जिम्मेदारी मिल गई। आरोप है कि इस दौरान बड़े पैमाने पर फर्जी डीसीआर का इस्तेमाल किया गया और ट्रक चालकों से वसूली गई राशि का बड़ा हिस्सा सरकारी खजाने तक पहुंचने के बजाय टुल्लू और उसके सिंडिकेट की जेब में गया। इससे उसने थोड़े ही समय में दर्जनों स्टोन क्रशर, खदानों, परिवहन और निर्माण सामग्री का विशाल कारोबार खड़ा कर लिया।

ऐशोआराम और जांच के घेरे में साम्राज्य

छोटे स्तर से शुरुआत करने वाले टुल्लू मंडल ने बीरभूम में आलीशान बहुमंजिला इमारतें और लग्जरी जीवनशैली अपनाई। कुछ समय पहले उसकी बेटी की भव्य शादी भी काफी चर्चा में रही थी, जिसमें बॉलीवुड कलाकारों की मौजूदगी और पानी की तरह बहाए गए पैसों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी थी। अब भारी मात्रा में नकदी और सोना बरामद होने के बाद जांच एजेंसियां उसकी कंपनियों, बेनामी संपत्तियों और वित्तीय नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

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