गोलाघाट (असम): असम के गोलाघाट जिले में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। दरगांव विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई गांव बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। आपदा का असर कुलियापानी और कामरबंधा पंचायतों के अंतर्गत आने वाले कापुहाटिंग, एन-पामुवा, राजानखत, खरजान, महातगांव और कुमरगांव समेत कई इलाकों में देखने को मिल रहा है।
जिले में करीब 180 गांव बाढ़ की चपेट में हैं, जिससे लगभग 52 हजार परिवार प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में घर पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं और कुलियापानी व कामरबंधा पंचायतों में कृषि भूमि के बड़े हिस्से को नुकसान पहुंचा है।
हालांकि पानी का स्तर कुछ कम हुआ है, लेकिन कई परिवार अभी भी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। बड़ी संख्या में मिट्टी के घर रहने लायक नहीं बचे हैं। कई घरों में अब भी कीचड़ और पानी भरा हुआ है, जिससे उनकी नींव और फर्श को भारी नुकसान पहुंचा है।
असम सरकार राहत शिविरों में रह रहे लोगों को भोजन, पीने का पानी और जरूरी दैनिक वस्तुएं उपलब्ध करा रही है। विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार राहत सामग्री में चावल, दाल, नमक, तेल, दवाइयां, पशु चारा, फिनाइल और ब्लीचिंग पाउडर वितरित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा कई स्वयंसेवी संगठन और संस्थाएं भी बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आई हैं। महातगांव क्षेत्र में ही 384 परिवार प्रभावित हुए हैं, जहां राहत शिविरों में जरूरी व्यवस्थाएं जारी हैं।
इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। उन्होंने राहत शिविरों का निरीक्षण कर विस्थापित लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
राहत सामग्री मिलने के बावजूद प्रभावित लोगों का कहना है कि यह सहायता उनके संकट को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है। लोगों के अनुसार उनकी कृषि भूमि, घर और आजीविका बर्बाद हो गई है, जिससे दोबारा जीवन शुरू करना बेहद मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों ने केंद्र सरकार से क्षेत्र के लिए विशेष आर्थिक पैकेज जारी करने और प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10 से 12 लाख रुपये की विशेष वित्तीय सहायता देने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुलियापानी क्षेत्र एक निचला और जलभराव वाला इलाका है, जहां आसपास की पहाड़ियों से आने वाला पानी जमा हो जाता है। कुलियापानी और टकाता नालों की संकरी संरचना के कारण पानी की निकासी प्रभावित होती है। लोगों का कहना है कि बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और वैकल्पिक जल निकासी मार्ग इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकते हैं।
बाढ़ प्रभावित निवासी धुर्बो दास ने कहा कि बाढ़ से इलाके में भारी नुकसान हुआ है। कई परिवारों ने अपने घर, कृषि भूमि और आय के साधन खो दिए हैं। राहत सामग्री से लोगों को सहारा मिला है, लेकिन पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहायता और स्थायी समाधान की जरूरत है।
वहीं, गोबिन दास ने कहा कि बाढ़ ने लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित की है। घरों को नुकसान पहुंचा है, खेत बर्बाद हो गए हैं और कई परिवार अभी भी वापस अपने घरों में नहीं लौट पाए हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि बीजेपी और उसके कार्यकर्ताओं ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री उपलब्ध कराई है। इसमें 1.8 लाख मेखला चादर, 1.8 लाख टी-शर्ट और 1.5 लाख मच्छरदानी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राहत अभियान जमीनी स्तर के बीजेपी कार्यकर्ताओं के योगदान से चलाया गया है और आने वाले दिनों में भी बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता जारी रहेगी।


