नई दिल्ली। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाली आपत्तिजनक और अनैतिक सामग्री पर लगाम कसने की तैयारी कर ली है। सरकार एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है, ताकि अनुचित कंटेंट को रोका जा सके। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस कानून को बनाते वक्त नागरिकों के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
क्यों पड़ी नए कानून की जरूरत?
गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने शुक्रवार को संसद में पेश अपनी 259वीं रिपोर्ट में कहा कि फिलहाल ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की व्यवस्था काफी हद तक सेल्फ-रेगुलेशन यानी खुद पर लगाम लगाने पर निर्भर है। इसकी वजह से अक्सर आपत्तिजनक कंटेंट आसानी से लोगों तक पहुंच जाता है। समिति ने सिफारिश की है कि नए नियमों में मजबूत तकनीक-आधारित आयु सत्यापन, प्रभावी पैरेंटल कंट्रोल और नियम तोड़ने पर सख्त जुर्माने का प्रावधान जरूर होना चाहिए।
बनेगा स्वतंत्र ‘पोस्ट-रिलीज रिव्यू पैनल’
समिति ने अपनी 254वीं रिपोर्ट में भी इस मुद्दे पर चिंता जताई थी और अब एक बार फिर एक स्वतंत्र ‘पोस्ट-रिलीज रिव्यू पैनल’ गठित करने की सलाह दी है। इस पैनल में बाल विकास, शिक्षा, कानून, सामाजिक विज्ञान और नागरिक समाज के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा, जो दर्शकों की शिकायतों के आधार पर चिह्नित या ट्रेंडिंग कंटेंट की समीक्षा करेंगे और जरूरी कदम उठाएंगे।
बच्चों पर क्यों बढ़ रहा खतरा?
समिति ने चिंता जताई कि भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स मनोरंजन का सबसे बड़ा जरिया बन चुके हैं और इनकी पहुंच पारंपरिक सिनेमाघरों से भी ज्यादा हो गई है। दर्शकों में नाबालिगों की तादाद बहुत ज्यादा है। जहां फिल्मों के लिए सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत रिलीज से पहले सर्टिफिकेशन जरूरी है, वहीं ओटीटी कंटेंट सिर्फ आईटी नियम, 2021 के तहत सेल्फ-क्लासिफिकेशन और रिलीज के बाद की शिकायत प्रणाली पर चलता है। प्री-रिलीज जांच न होने और उम्र पुष्टि के कमजोर सिस्टम के कारण बच्चे आसानी से अश्लील सामग्री के संपर्क में आ रहे हैं।
सांस्कृतिक संवेदनशीलता का रखा जाएगा ध्यान
समिति ने सुझाव दिया है कि सरकार एक मान्यता प्राप्त एक्सपर्ट पैनल बनाए, जो नई ओटीटी रिलीज पर नजर रखेगा। यह पैनल देश की सांस्कृतिक मान्यताओं और संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उचित नियम और दिशानिर्देश तैयार करेगा। इतना ही नहीं, समिति ने यह भी कहा कि पैनल को नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने का अधिकार भी दिया जाना चाहिए।













