भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने रविवार को केरल हाई कोर्ट के प्लैटिनम जुबली समारोह में न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हमेशा हाई कोर्ट्स की संस्थागत स्वायत्तता और अपने रोस्टर को नियंत्रित करने के अधिकार का सम्मान करता रहा है। हालांकि, जरूरी मामलों में जल्द सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचने वाले याचिकाकर्ताओं की बढ़ती संख्या पर आत्ममंथन करने की जरूरत है।
कोच्चि में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा कि देश के हाई कोर्ट्स की संवैधानिक भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट्स के अधिकार क्षेत्र और उनकी स्वतंत्र कार्यप्रणाली का सम्मान करता है, लेकिन बार-बार जल्द सुनवाई की मांग लेकर शीर्ष अदालत पहुंचने वाले मामलों से न्यायिक प्रक्रिया की जवाबदेही और तत्परता पर विचार करने की आवश्यकता सामने आती है।
उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने अपनी तरफ से हाई कोर्ट्स की संस्थागत स्वायत्तता का लगातार सम्मान किया है, जिसमें उनके अपने रोस्टर को नियंत्रित करने का अधिकार भी शामिल है।”
CJI ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सामने ऐसे अनुरोधों की बार-बार बढ़ती संख्या यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या न्यायिक प्रक्रियाओं की रिस्पॉन्सिवनेस को बेहतर बनाने की गुंजाइश है।
केरल हाई कोर्ट मना रहा 75वां स्थापना वर्ष
केरल हाई कोर्ट 1 नवंबर 2026 को अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्लैटिनम जुबली समारोह मना रहा है। इस खास मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने समारोह का उद्घाटन किया।
केरल हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, कार्यक्रम में केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल तथा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सरसा वेंकटनारायण भट्टी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
हाई कोर्ट परिसर में हुआ उद्घाटन समारोह
प्लैटिनम जुबली समारोह का उद्घाटन 1 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजे केरल हाई कोर्ट परिसर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केरल हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सौमेन सेन ने की।
इस अवसर पर न्यायपालिका की संवैधानिक भूमिका, हाई कोर्ट्स की संस्थागत स्वायत्तता और न्यायिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषय चर्चा के केंद्र में रहे।













