नई दिल्ली: हाल ही में आए चक्रवात अर्नब का असर अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि कुदरत की एक और नई आफत ने भारत के पूर्वी तट पर अपनी दस्तक दे दी है। बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में उठा एक गहरा दबाव अब चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ में तब्दील हो चुका है और तेजी से तटीय इलाकों की तरफ बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह चक्रवात 3 नवंबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकरा सकता है, जिसके चलते आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की आशंका बनी हुई है।
खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश व ओडिशा के तटीय जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। विशाखापत्तनम से फिलहाल करीब 660 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद इस तूफान के खतरे को देखते हुए संवेदनशील इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है।
दिलचस्प बात यह है कि इस चक्रवात का नाम ‘मुरासु’ तमिलनाडु की प्राचीन भाषा से लिया गया है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘नगाड़ा’ या ‘युद्ध का ढोल’ होता है। प्राचीन काल में जीत या किसी बड़ी मुनादी के लिए मुरासु बजाया जाता था। हिंद महासागर क्षेत्र के चक्रवातों की नामकरण प्रणाली के तहत यह नाम भारत द्वारा ही प्रस्तावित सूची से लिया गया है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल यही है कि समय रहते सभी पुख्ता इंतजाम कर लिए जाएं ताकि किसी भी तरह की जनहानि को रोका जा सके।













