सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को सुझाव दिया है कि वह चालू शैक्षणिक सत्र के लिए कक्षा 6 के छात्रों को अपनी त्रि-भाषा नीति से छूट देने पर विचार करे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सीबीएसई की इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस मामले को 17 सितंबर तक के लिए टाल दिया है और बोर्ड से कहा है कि वह छात्रों को समायोजित करने की संभावना तलाश करे।
पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि यदि कक्षा 6 के छात्रों को शुरुआती बिंदु के रूप में चुना गया है, तो इस वर्ष उन्हें राहत देकर इसे अगले सत्र से लागू करने पर विचार किया जा सकता है। एसजी मेहता ने अदालत को आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारी और बोर्ड सर्वोच्च न्यायालय के इस सुझाव पर विचार करेंगे। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने चिंता जताई कि बार-बार स्थगन से छात्रों की परीक्षाओं और अभिभावकों की चिंता पर असर पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि सीबीएसई के एक सर्कुलर के अनुसार कक्षा 9 और उससे निचले स्तर पर तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाओं का शामिल होना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी जोर दिया कि उपलब्ध भाषा विकल्पों के लिए पर्याप्त मानव संसाधन और बुनियादी ढांचा तैयार करना आवश्यक है ताकि छात्रों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक दबाव न बने।



