उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शाखा से एक बेहद हृदयविदारक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (जेवर एयरपोर्ट) के निर्माण के लिए अपनी पुश्तैनी जमीनें देने वाले किसानों की जिंदगी भर की कमाई पर डाका पड़ गया है। शासन से मिले मुआवजे की रकम को किसानों ने अपने भविष्य, बच्चों की शादी और बुढ़ापे के सहारे के लिए पंजाब नेशनल बैंक में जमा कराया था। लेकिन जब जरूरतमंद किसानों ने बैंक जाकर खाते चेक किए, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई; खातों से करोड़ों रुपये गायब थे।
पहले जमीन गई, अब मुआवजा भी डूबा! पीएनबी बैंक में रखी जिंदगीभर की पूंजी गायब, रो रहे किसान परिवार।
ग्रेटर नोएडा में बैंक खातों से करोड़ों रुपये गायब होने के आरोपों ने कई परिवारों की जिंदगी में भूचाल ला दिया है।
नोएडा एयरपोर्ट के लिए किसानों ने अपनी जमीन दी थी। बदले में जो मुआवजा मिला, उसे भविष्य की सुरक्षा समझकर पंजाब नेशनल बैंक में जमा कर दिया।
किसी को बेटे की शादी करनी थी। किसी को सिर पर छत बनानी थी। किसी ने बुढ़ापे के सहारे के लिए रकम बचाकर रखी थी।
पीड़ितों की आपबीती के मुताबिक, जब जरूरत पड़ी तो खातों से रकम गायब मिली।
एक पिता के सामने बेटे की शादी का संकट है। एक बुजुर्ग महिला का मकान अधूरा है। एक परिवार लाखों रुपये जमा होने के बावजूद उधार लेने को मजबूर है।
रिपोर्टों में 30 से 35 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी, 18 खाताधारकों की शिकायत और पांच कर्मचारियों के निलंबन का जिक्र है।
सवाल सिर्फ यह नहीं कि पैसा कहां गया। सवाल यह भी है कि जिन लोगों ने बैंक पर भरोसा करके अपनी जमा-पूंजी रखी, उनके सपनों और और भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?
बैंक प्रबंधन और जांच एजेंसियों को बताना होगा कि रकम कैसे निकली, किसकी जवाबदेही है और पीड़ितों को उनका पैसा कब वापस मिलेगा।
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— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) October 29, 2026
पीड़ित परिवारों की आपबीती सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं। किसी पिता के सामने बेटे की तय शादी टूटने का संकट खड़ा हो गया है, तो कोई बुजुर्ग महिला अपने अधूरे बने मकान की छत ढलवाने के लिए तरस रही है। लाखों रुपये बैंक खाते में जमा होने के बावजूद पीड़ित किसान अपनों के इलाज और घरेलू जरूरतों के लिए दूसरों से उधार मांगने को मजबूर हैं। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, बैंक खातों में करीब 30 से 35 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़े का अनुमान जताया गया है।
इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद अब तक 18 खाताधारकों ने पुलिस और प्रशासन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक प्रबंधन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए 5 बैंक कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। उच्चस्तरीय जांच एजेंसियां और पुलिस की स्पेशल टीम पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। हालांकि, बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि सरकारी बैंक पर भरोसा करने वाले इन गरीब किसानों के डूबे हुए सपनों और भविष्य की जवाबदेही कौन लेगा और उन्हें उनकी मेहनत का पैसा वापस कब मिलेगा।












