डे्स्क : स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में इस्तेमाल किए गए “दिमागी नक्सल” शब्द के बाद सोशल मीडिया पर एक नए अकाउंट ने लोगों का ध्यान खींचा है। इस अकाउंट का नाम दिमागी नक्सल पार्टी (DNJP) रखा गया है।
बता दे कि इससे पहले देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम का ट्रेंड सामने आया था। अब उसी तरह दिमागी नक्सल पार्टी को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है।
दिमागी नक्सल पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा गया है, “जब कोई दिमागी नक्सल कहता है तो मुझे बस समझदार बागी सुनाई देता है।” वहीं एक्स पर @DNJP_India हैंडल के हजारों फॉलोअर्स हो चुके हैं।
कई सोशल मीडिया यूजर्स ने समर्थन जताते हुए अपने नाम के आगे “दिमागी नक्सल” जोड़ लिया है। पार्टी की एक वेबसाइट भी बनाई गई है, जहां घोषणापत्र और एंथम जारी किया गया है। वेबसाइट पर 2006 में आई फिल्म ‘रंग दे बसंती’ की एक क्लिप का लिंक भी दिया गया है, जिसमें क्रांतिकारी कविता “सरफरोशी की तमन्ना” दिखाई गई है।
कौन है दिमागी नक्सल पार्टी का संस्थापक?
दिमागी नक्सल पार्टी के संस्थापक की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। ऑनलाइन यह व्यक्ति “अ दिमागी इंडियन” नाम से जाना जाता है।DNJP की वेबसाइट पर इसे कॉकरोच जनता पार्टी की सिबलिंग पार्टी बताया गया है। पार्टी का पहला पोस्ट भी CJP के शुरुआती ट्वीट से प्रेरित बताया जा रहा है।हालांकि, DNJP ने खुद को CJP से अलग बताते हुए अपने घोषणापत्र में कहा है कि पार्टी का कोई झंडा, फॉन्ट या सार्वजनिक चेहरा नहीं होगा। पार्टी से जुड़ने के लिए सिर्फ “काम करता हुआ दिमाग और सवाल पूछने की इच्छा” को जरूरी बताया गया है।
पीएम मोदी की टिप्पणी के बाद कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर खुद को “दिमागी नक्सल” कहने पर गर्व जताया। वहीं अभिनेता प्रकाश राज ने भी एक वीडियो साझा कर लोगों से सोचने और सवाल करने की अपील की।
सरकार ने दी दिमागी नक्सल की परिभाषा
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह शब्द विपक्ष के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया था। उन्होंने इसके तीन आधार बताए।उन्होंने कहा कि दिमागी नक्सल उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया है जो माओवादियों का समर्थन करते हैं, संविधान को नहीं मानते, अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं या देश को तोड़ने वाली गतिविधियों का समर्थन करते हैं।फिलहाल सोशल मीडिया पर दिमागी नक्सल पार्टी को लेकर बहस जारी है और यह नया डिजिटल राजनीतिक ट्रेंड चर्चा का विषय बना हुआ है।












