नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को पुराने स्वरूप में दोबारा संसद में पेश करती है तो कांग्रेस इसका विरोध करेगी।
कार्ति चिदंबरम ने रविवार को शिवगंगा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पार्टी इस विधेयक का विरोध करेगी, अगर इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कानूनों का इस्तेमाल कर संस्थाओं को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि शुरुआत में सरकार ने FCRA Bill पेश किया था, लेकिन नागरिक संगठनों और धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों की ओर से विरोध के बाद इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन समूहों से चर्चा की है या नहीं, यह बिल संसद में आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
उन्होंने कहा, “अगर बिल पुराने स्वरूप में लाया गया तो हम इसका कड़ा विरोध करेंगे, क्योंकि यह कानून के जरिए संस्थाओं और निकायों को नियंत्रित करने का एक और उदाहरण होगा।”
केंद्र सरकार के मानसून सत्र के आखिरी सप्ताह में इस विधेयक को पेश करने की संभावना है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कहा है कि पार्टी FCRA बिल का विरोध करेगी और इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के फ्लोर नेताओं की बैठक में चर्चा होगी।
कांग्रेस ने लोकसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है, जिसमें 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में उनकी अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है।
प्रस्तावित विधेयक में प्रावधान है कि किसी संगठन का FCRA पंजीकरण समाप्त होने, नवीनीकरण नहीं होने या सरकार द्वारा नवीनीकरण से इनकार किए जाने पर उसकी विदेशी फंडिंग से जुड़ी गतिविधियां प्रभावित होंगी। इसमें विदेशी योगदान और संबंधित संपत्तियों की निगरानी, पर्यवेक्षण और प्रबंधन के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने का भी प्रस्ताव है।
इस विधेयक को ईसाई समूहों और अल्पसंख्यक संगठनों की ओर से विरोध का सामना करना पड़ा है। इन समूहों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपनी चिंताएं भी रखी हैं।














