अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा (रामधन) चोरी के प्रकरण ने अब एक नया और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। इस मामले में जांच की आंच अब उस शख्स तक पहुँच गई है, जो मंदिर परिसर की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी का जिम्मा संभालता था। करीब 1600 CCTV कैमरों और काउंटिंग रूम की मॉनिटरिंग से जुड़े रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, अर्जुन देव लंबे समय से अयोध्या में तैनात थे और पूरे सुरक्षा तंत्र में उनकी अहम भूमिका थी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मंदिर परिसर और रामधन की गिनती पर 1600 कैमरों की कड़ी निगरानी थी, तो करोड़ों के चढ़ावे की चोरी कैसे होती रही? आरोप है कि अर्जुन देव, जो मंदिर के प्रशासनिक गलियारों में काफी प्रभावशाली माने जाते थे, उन्हें हर सुरक्षा बारीकी और टाइमिंग का पता था। जांच में यह भी सामने आया है कि अर्जुन देव पिछले करीब 17 वर्षों से अयोध्या में जमे हुए थे। दिलचस्प बात यह है कि कई बार उनके तबादले के आदेश हुए, लेकिन वे हर बार किसी न किसी प्रभावशाली संरक्षण के कारण रुकते रहे।
मामला तब और अधिक संदिग्ध हो गया जब संत समाज ने यह आरोप लगाया कि निगरानी तंत्र के साथ छेड़छाड़ की गई और कई बार CCTV फुटेज डिलीट या ‘गायब’ किए गए। अब SIT और पुलिस इस पहलू की भी गहन पड़ताल कर रही है कि आखिर उन्हें किसका वरदहस्त प्राप्त था। अर्जुन देव न केवल सुरक्षा और वायरलेस ड्यूटी तक सीमित थे, बल्कि वीआईपी दर्शन और अन्य संवेदनशील व्यवस्थाओं में भी उनकी सीधी दखलंदाजी थी।
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले में पूछताछ करने के बजाय उन्हें चुपचाप गोरखपुर स्थानांतरित (तबादला) कर दिया गया, जिससे संदेह और गहरा गया है। क्या 1600 कैमरों की निगरानी रखने वाला यह ‘अर्जुन’ लूट के वक्त वाकई अंधा हो गया था, या फिर यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था? फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इन सभी बिंदुओं को जोड़कर सच सामने लाने की कोशिश कर रही हैं













