तेलंगाना के फायरब्रांड नेता और विधायक टी राजा सिंह को हैदराबाद की एक विशेष अदालत द्वारा साल 2022 के एक विवादित धार्मिक टिप्पणी मामले में बरी किए जाने के बाद देश में एक नई कानूनी बहस छिड़ गई है। हर कोई यह सवाल पूछ रहा है कि क्या इस फैसले का असर पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ चल रहे मामलों पर भी पड़ेगा? इस बीच, अदालत में टी राजा सिंह का केस लड़ने वाले वरिष्ठ वकील और भाजपा नेता एडवोकेट करुणासागर ने इस पूरे मामले पर स्थिति साफ करते हुए बेहद महत्वपूर्ण कानूनी विश्लेषण साझा किया है।
अदालतों के लिए ‘बाध्यकारी’ नहीं, लेकिन है ‘असरदार महत्व’
मीडिया से बातचीत के दौरान एडवोकेट करुणासागर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नूपुर शर्मा को राहत मिलना काफी हद तक उनके खिलाफ चल रहे मामलों की सही और निष्पक्ष जांच पर निर्भर करेगा। उन्होंने समझाया, “टी राजा सिंह के बरी होने के बाद कई लोग नूपुर शर्मा के पेंडिंग केस को लेकर सवाल कर रहे हैं। कानूनी स्थिति यह है कि नूपुर शर्मा पर भी लगभग ऐसे ही आरोप हैं, क्योंकि उन्होंने भी अपनी टिप्पणी में उसी सामग्री का जिक्र किया था जिसका स्रोत इस्लामिक साहित्य बताया गया था। तकनीकी रूप से, हैदराबाद की अदालत का यह फैसला अन्य अदालतों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है, लेकिन एक सही और निष्पक्ष जांच के महत्व को लेकर इसकी एक ‘असरदार वैल्यू’ जरूर होगी।”
अदालत को नहीं मिला आगे बढ़ने का कोई आधार
गौरतलब है कि हैदराबाद में सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने मंगलवार को टी राजा सिंह को आईपीसी (IPC) की धारा 153A(a)(b), 295A, 504, 505(2) और 506 के तहत दर्ज 2022 के एक मामले से पूरी तरह बरी कर दिया था। यह मामला मंगलहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।
करुणासागर ने बताया कि शिकायतकर्ता ने खुद अदालत में यह स्वीकार किया कि विधायक द्वारा की गई टिप्पणियों के संदर्भ इस्लामिक साहित्य में मौजूद थे। कोर्ट ने सभी गवाहों के बयानों और पेश किए गए सबूतों की बारीकी से जांच करने के बाद माना कि विधायक के खिलाफ कोई ठोस मामला नहीं बनता है। बता दें कि साल 2022 में एक टीवी डिबेट के दौरान की गई टिप्पणियों के बाद नूपुर शर्मा के खिलाफ भी देश के अलग-अलग राज्यों में कई एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थीं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली ट्रांसफर किया गया था।














