मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ईरान के दक्षिणी इलाकों में अमेरिकी वायुसेना और नौसेना द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने बुधवार सुबह अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर सीधे और बड़े हमले करने का दावा किया है। ईरान ने बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के सबसे महत्वपूर्ण ‘फिफ्थ फ्लीट’ (5th Fleet) मुख्यालय पर आत्मघाती ड्रोन से हमला किया है, साथ ही जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस को भी लंबी दूरी की मिसाइलों से निशाना बनाया है।
ईरानी मीडिया के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक आधिकारिक बयान जारी कर चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका की यह सैन्य आक्रामकता इसी तरह जारी रही, तो उसे इससे भी अधिक कड़ा और विनाशकारी जवाब भुगतना होगा। आईआरजीसी ने अमेरिका पर ‘झूठे बहाने’ बनाकर ईरान की संप्रभुता पर हमला करने का आरोप लगाया। ईरान का दावा है कि आज सुबह-सुबह अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने जास्क, सिरिक और केशम (Qeshm) द्वीपों को निशाना बनाया, जिससे सिरिक बंदरगाह शहर में एक टेलीकम्युनिकेशन टावर और पेयजल की दो टंकियां पूरी तरह नष्ट हो गईं। इस हमले के बाद बहरीन में हड़कंप मच गया और वहां मिसाइल अलर्ट के सायरन बजाकर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की हिदायत दी गई।
अमेरिका की दलील ‘अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने का लिया बदला’
दूसरी तरफ, यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए इसे पूरी तरह ‘आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई’ बताया है। सेंटकॉम के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) के पास गश्त कर रहे अमेरिकी सेना के एक आधुनिक ‘अहाश-64 अपाचे’ (AH-64 Apache) अटैक हेलीकॉप्टर को ईरानी सेना द्वारा मार गिराया गया था। हालांकि, इसमें सवार दोनों अमेरिकी पायलटों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इस घटना के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हरकत के लिए सीधे तौर पर तेहरान को जिम्मेदार ठहराया और जबरदस्त सैन्य जवाब देने के निर्देश दिए।
राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी वायुसेना के F-16 फाइटर जेट्स और नौसेना के युद्धपोतों ने होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और सर्विलांस रडार साइटों पर सटीक हथियारों (Precision Weapons) से हमला कर उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में वाणिज्यिक जहाजों (Commercial Ships) की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान की अनुचित आक्रामकता का आनुपातिक जवाब देने के लिए बेहद जरूरी थी। इस ताजा सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के बीच महीनों से चला आ रहा नाजुक संघर्षविराम (Ceasefire) पूरी तरह टूट गया है और क्षेत्र में पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका गहरा गई है।













