लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए नई स्थानांतरण नीति (Transfer Policy) का मसौदा तैयार कर लिया है। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और कुशलता लाने के उद्देश्य से तैयार की गई इस नीति के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों और कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से स्थानांतरित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल कार्यप्रणाली में नई ऊर्जा आएगी, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगेगा।
तबादलों का नया पैमाना: 3 और 7 साल का नियम
नई नीति के अनुसार, अब किसी जिले में तीन साल और मंडल स्तर पर सात साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों का तबादला अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, एक ही पद या सीट पर वर्षों से बैठे कर्मचारियों को भी विभाग बदलने या अन्यत्र स्थानांतरित करने का प्रावधान किया गया है।
तबादलों की अधिकतम सीमा भी निर्धारित की गई है:
- समूह ‘क’ और ‘ख’: इन अधिकारियों के लिए अधिकतम 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे।
- समूह ‘ग’ और ‘घ’: इन कर्मचारियों के लिए तबादले की सीमा 10 प्रतिशत रखी गई है।(विशेष परिस्थिति में विभागीय मंत्री की अनुमति से इस सीमा को बढ़ाया जा सकता है।)
दिव्यांगों और परिवारों के लिए मानवीय दृष्टिकोण
नीति में मानवीय संवेदनाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले कर्मचारियों को सामान्य तबादलों से छूट दी जाएगी। यदि कोई दिव्यांग कर्मचारी स्वयं स्थानांतरण चाहता है, तो उसे उसकी पसंद के जिले में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, जिन कर्मचारियों के परिवार में गंभीर रूप से अक्षम या मंदबुद्धि बच्चे हैं, उन्हें भी उनकी इच्छा के अनुसार तैनाती देने का प्रस्ताव है।
पति-पत्नी के लिए राहत और गृह जनपद पर पाबंदी
सरकारी सेवा में कार्यरत पति-पत्नी को यथासंभव एक ही जिले या निकटवर्ती जिलों में तैनात करने का प्रयास किया जाएगा। वहीं, अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समूह ‘क’ के अधिकारियों को उनके गृह जिले और मंडल स्तर के पदों पर गृह मंडल में तैनाती नहीं दी जाएगी।
भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार
‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत, संदिग्ध सत्यनिष्ठा (Doubtful Integrity) वाले कर्मचारियों को किसी भी संवेदनशील पद पर नियुक्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आकांक्षी जिलों और विकास खंडों में रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा ताकि विकास की गति प्रभावित न हो। विभागाध्यक्षों को पूरी तबादला प्रक्रिया संपन्न करने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। उच्च स्तरीय बैठक में इस मसौदे पर सहमति बन चुकी है और कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे प्रदेश भर में लागू कर दिया जाएगा।












