लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की एक अदालत से बेहद हैरान और हैरान करने वाला अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसे सुनकर खुद न्यायाधीश भी दंग रह गए। यहां 17 साल पुराने एक दहेज उत्पीड़न के मामले में कोर्ट ने पुलिस मालखाने में सुरक्षित जमा कराए गए सोने के जेवरातों को उसके असली मालिक को वापस सौंपने का आदेश जारी किया था। लेकिन जब इन कीमती जेवरातों को वापस करने का समय आया, तो स्थानीय पुलिस ने अदालत के सामने जो दलील पेश की, उसने हर किसी को सोच में डाल दिया है।
पुलिस द्वारा कोर्ट में लिखित रूप से दी गई कहानी के मुताबिक, मालखाने के भीतर रखी सोने के जेवरों की पोटली अत्यधिक बारिश के कारण भीग गई थी। उसे सुखाने के उद्देश्य से मालखाने के स्टाफ ने थाने की छत पर रख दिया था, तभी अचानक वहां आए बंदरों का एक झुंड उस पूरी पोटली को ही उठाकर रफूचक्कर हो गया। बताया जा रहा है कि गायब हुई उस पोटली में सोने की एक अंगूठी, एक कीमती हार और 10 सोने की चूड़ियां सुरक्षित रखी गई थीं।
अदालत ने पुलिस प्रशासन के इस हास्यास्पद और गैर-जिम्मेदाराना स्पष्टीकरण पर कड़े तेवर दिखाए हैं और गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि सरकारी मालखाने की सुरक्षा में रखे गए लाखों रुपये के जेवरात आखिर किसकी अनुमति से थाने की छत तक पहुंच गए? कोर्ट ने इसे पुलिस विभाग की घोर लापरवाही मानते हुए जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ तत्काल जांच और सख्त दंडात्मक कानूनी कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। फिलहाल यह अजीबोगरीब ‘बंदर कथा’ पूरी अदालत और कानूनी गलियारों में भारी चर्चा और तंज का विषय बनी हुई है।



