वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सबसे अहम मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट के नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग एक बार फिर तेज हो गई है। मुंबई में ईरान के कॉन्सुल जनरल सईद रेजा मोसायेब मोटलाग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर वॉशिंगटन का पूरा नियंत्रण है। ईरानी राजनयिक ने ट्रंप के इस बयान को “झूठा” करार देते हुए स्पष्ट किया कि यह सामरिक रूप से महत्वपूर्ण वॉटरवे पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार यह दावा किया कि अमेरिका नाकेबंदी के जरिए इस स्ट्रेट को कंट्रोल करता है और इसे अमेरिकी इलाका घोषित किया जाना चाहिए। ट्रंप का यह भी कहना था कि जलमार्ग खुला हुआ है और ईरान पर भारी आर्थिक व सैन्य दबाव बना हुआ है। हालांकि, ईरानी पक्ष ने इन सभी दावों की धज्जियां उड़ाते हुए कहा है कि ट्रंप के बयानों से ऐसा लगता है कि उन्हें जमीनी हकीकत का अंदाजा ही नहीं है।
ईरानी कॉन्सुल जनरल ने जोर देकर कहा कि इस जलमार्ग से जुड़े भविष्य के किसी भी समझौते या इंतजाम में ईरान के साथ-साथ फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के पड़ोसी देशों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने यह भी साफ किया कि तेहरान 14-सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत अपनी शर्तें पूरी होने और अमेरिका द्वारा अपने वादों को पूरा करने के बाद ही इस स्ट्रेट को अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए दोबारा खोलने पर विचार कर सकता है।
इस बीच, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक अमेरिका नाकेबंदी हटाने, जमे हुए एसेट्स को रिलीज करने और तेल प्रतिबंधों को समाप्त करने जैसे अपने कमिटमेंट्स पूरे नहीं करता, तब तक यह मार्ग बंद ही रहेगा। वॉशिंगटन और तेहरान के इन विरोधाभासी बयानों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए बड़ी अनिश्चितता पैदा कर दी है, क्योंकि इस रूट से दुनिया के एक बड़े हिस्से का तेल और गैस का कारोबार होता है।













