वॉशिंगटन/तेहरान। 107 दिनों तक चले तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में अमेरिका और ईरान के बीच बड़ी प्रगति हुई है। दोनों देशों ने शांति समझौते पर सहमति जताई है और जल्द ही स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस घोषणा के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर समझौते की जानकारी साझा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम और स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। समझौते के तहत दोनों पक्ष तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हुए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, आगामी 60 दिनों के सीजफायर के दौरान परमाणु कार्यक्रम, आर्थिक प्रतिबंध, फ्रीज फंड की वापसी और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत वार्ता होगी। अंतिम समझौते तक अंतरिम व्यवस्थाएं लागू रहेंगी।

समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धियों में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की तैयारी शामिल है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। इसके खुलने से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।

ड्राफ्ट समझौते के अनुसार अमेरिका ईरान की लगभग 25 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी कर सकता है। वहीं ईरान परमाणु हथियार विकसित न करने और यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम के विस्तार पर नियंत्रण रखने का आश्वासन देगा।

इस समझौते में पाकिस्तान की मध्यस्थता की भी चर्चा है। वहीं इजरायल ने इस पूरे घटनाक्रम पर सतर्क रुख अपनाया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ेगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

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