उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद अहम और बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में निष्पक्षता और बेहतर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन (Character Verification) के नियमों को और अधिक कड़ा व पारदर्शी बना दिया है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि कोई अभ्यर्थी किसी भी प्रकार की हिंसा, तोड़फोड़ या गंभीर आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसे सरकारी नौकरी के लिए पूरी तरह अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।
लखनऊ
➡️हिंसा की तो नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी
➡️गंभीर अपराधों में शामिल अभ्यर्थी होंगे अयोग्य
➡️चरित्र सत्यापन के नियम और सख्त किए गए
➡️रिजीम चेंज को लेकर सरकार का सख्त नियम
➡️हिंसा या प्रदर्शन में शामिल हुए तो नौकरी नहीं
➡️हालांकि विचारधारा के आधार पर नहीं होगा फैसला
➡️शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर भी नहीं होगी कार्रवाई
➡️पुलिस को 30 दिन में देना होगा चरित्र सत्यापन
➡️चरित्र सत्यापन के लिए नई प्रक्रिया का आदेश#Lucknow #GovernmentJobs #UttarPradeshNews
— भारत समाचार | Bharat Samachar (@bstvlive) October 29, 2026
정권 या शासन व्यवस्था में बदलाव (रिजीम चेंज) से जुड़ी हिंसक गतिविधियों, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या उग्र प्रदर्शनों का हिस्सा बनने वाले युवाओं को अब सरकारी सेवा का अवसर नहीं मिलेगा। हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि केवल विचारधारा या राजनीतिक दृष्टिकोण के आधार पर किसी भी अभ्यर्थी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, लोकतांत्रिक दायरे में रहकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा और उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।
चरित्र सत्यापन की इस पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए नए आदेश जारी किए गए हैं। इसके तहत पुलिस विभाग को निर्देश दिया गया है कि अभ्यर्थियों की कैरेक्टर वेरिफिकेशन रिपोर्ट हर हाल में 30 दिनों के भीतर तैयार कर संबंधित विभाग को सौंपनी होगी। इस नई प्रक्रिया से जहां एक ओर सरकारी सेवाओं में पारदर्शी और स्वच्छ छवि वाले युवाओं का चयन सुनिश्चित होगा, वहीं दूसरी ओर सत्यापन के नाम पर होने वाले अनावश्यक विलंब पर भी प्रभावी रोक लगेगी।












