हेल्थ डेस्क : स्वीडन में 3.7 मिलियन (37 लाख) लोगों पर की गई एक बेहद व्यापक स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गर्भ में पल रहे बच्चे (फीटस) को होने वाले दुर्लभ ‘TORCH’ संक्रमण से बच्चों में बाद के जीवन में ऑटिज़्म और इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी (बौद्धिक अक्षमता) का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। ‘साइंसडेली’ और प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘JAMA पीडियाट्रिक्स’ में प्रकाशित कैरोलिंस्का इंस्टिट्यूट की इस रिसर्च के अनुसार, जिन बच्चों को जन्मजात TORCH संक्रमण होता है, उनमें ऑटिज़्म होने की संभावना सामान्य बच्चों की तुलना में लगभग तीन गुना, इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी की संभावना सात गुना और गंभीर बौद्धिक अक्षमता का खतरा 30 गुना तक बढ़ जाता है।
TORCH संक्रमणों के इस समूह में साइटोमेगालोवायरस, रूबेला, टोक्सोप्लाज़मोसिस और हर्पीसवायरस जैसे पैथोजन्स शामिल हैं, जो कभी-कभी प्लेसेंटा को पार करके अजन्मे बच्चे तक पहुंच जाते हैं। हालांकि ऐसे संक्रमण होना आम बात नहीं है और कुल आबादी में ऑटिज़्म के मामलों में इनका हिस्सा बहुत कम होता है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर प्रभावित बच्चों के लिए इसका जोखिम काफी गंभीर होता है। रिसर्चर्स का अनुमान है कि स्वीडन में गंभीर इंटेलेक्चुअल डिसेबिलिटी के लगभग 1.2 प्रतिशत मामले और ऑटिज़्म के लगभग 0.034 प्रतिशत मामले इन संक्रमणों के कारण हो सकते हैं, और TORCH के साथ पैदा होने वाले लगभग पांच में से एक बच्चे को बाद में ऑटिज़्म हो सकता है।
कैरोलिंस्का इंस्टिट्यूट के ग्लोबल पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की रिसर्चर रेनी गार्डनर और लीड ऑथर ह्यूगो सोजक्विस्ट के मुताबिक, यह अब तक की इस फील्ड में सबसे बड़ी स्टडी है जो नेशनल रजिस्टर डेटा पर आधारित है। हालांकि इन संक्रमणों और ADHD या OCD जैसे विकारों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं मिला, लेकिन स्कूल के प्रदर्शन में गिरावट जरूर देखी गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि रूबेला जैसी बीमारियों के लिए वैक्सीनेशन प्रोग्राम यह साबित करते हैं कि सही रोकथाम से ऐसे गंभीर खतरों को काफी हद तक टाला जा सकता है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान उचित सावधानी और टीकाकरण बेहद जरूरी हैं।



