संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ द्वारा दिए गए भाषण पर भारतीय कूटनीतिक हलकों और विदेश नीति के विशेषज्ञों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व राजनयिक (डिप्लोमैट) महेश सचदेव ने शहबाज़ शरीफ़ के संबोधन को गुमराह करने वाला और तथ्यों से परे करार देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक बनावटी नाटक था, जिसमें आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर इस्लामाबाद के दोहरे रवैये को छुपाने की कोशिश की गई।
बता दें, विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान एक तरफ खुद को शांतिप्रिय देश के रूप में पेश करता है, तो दूसरी तरफ भारत, अफगानिस्तान और ईरान जैसे पड़ोसी देशों के साथ उसके तनावपूर्ण संबंध उसकी असलियत बयां करते हैं। यूएनजीए के मंच से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने सिंधु जल संधि और कश्मीर का राग अलापा, लेकिन उनकी सरजमीं से संचालित होने वाले आतंकी संगठनों और आतंकवाद को मिलने वाले राजकीय संरक्षण पर पूरी तरह चुप्पी साध ली।
भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र में अपने ‘राइट टू रिप्लाई’ (जवाब देने के अधिकार) का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने दो टूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान का यह दावा पूरी तरह खोखला है कि वह आतंकवाद के खिलाफ है। भारत ने दुनिया का ध्यान इस बात की ओर खींचा कि किस तरह 9/11 हमलों का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान की मुख्य सैन्य अकादमी के पास सुरक्षित माहौल में रह रहा था। इसके अलावा, भारत ने स्पष्ट किया कि पिछले साल मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान यह साफ हो चुका है कि भारत अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़े और निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
भारत ने पीओके में मानवाधिकारों के हनन, अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों और वहां की तानाशाही सेना के शासन का पर्दाफाश करते हुए दुनिया को चेतावनी दी कि पाकिस्तान के पाखंड और झूठ को अब और नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही, भारत ने यह भी दोहराया कि सिंधु जल संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद नहीं कर देता।














