शंघाई के नेशनल एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर की हॉल में इन दिनों मशीनों की गूंज, औजारों की खटखट और युवा हुनरमंदों की चुप्पी मिलकर एक नई कहानी लिख रही है। 48वीं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता में 68 देशों-क्षेत्रों के 1,385 प्रतिभागी 64 कौशल स्पर्धाओं में अपना दम दिखा रहे हैं। लेकिन इस बार मामला सिर्फ मेडल का नहीं है। यहां असली सवाल यह है। AI के दौर में हुनर की कीमत कैसे तय होगी?
इस साल सात नई श्रेणियां जुड़ीं। डिजिटल मीडिया इंटरैक्टिव डिजाइन, इंटेलिजेंट सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग और अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स जैसी। एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े इवेंट अब लगभग एक-तिहाई हैं। जजमेंट के मापदंड भी बदले हैं। इंटेलिजेंट सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी में सॉफ्टवेयर कॉन्फ़िगरेशन, ऑपरेशन और ऑप्टिमाइजेशन 85% अंक तय करते हैं; हार्डवेयर सिर्फ 15%. मतलब साफ है। सिर्फ हाथ का काम नहीं, मशीन के साथ तालमेल बड़ा मुद्दा है।

डीवॉल्ट के 500 से ज्यादा प्रतिभागियों पर हुए सर्वे में 83% युवाओं ने कहा AI और डिजिटल टूल्स को स्किल एजुकेशन में शामिल होना चाहिए। लेकिन 80% ने यह भी कहा हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग की जगह कोई नहीं ले सकता। यानी AI को वे साथी मानते हैं, बॉस नहीं।

डिजिटल इंटरैक्टिव मीडिया डिजाइन में प्रतिभागी 20 घंटे से ज्यादा प्रोडक्शन में लगाते हैं। AI से बने विजुअल इफेक्ट्स में भी इंसान को गलती पकड़नी होती है, सुधार के सटीक निर्देश देने होते हैं और आउटपुट को फिर से प्रोसेस करना होता है। एक प्रोफेसर ने कहा अच्छा डिजाइनर AI को ‘डॉक्टरेट स्टूडेंट’ की तरह ट्रेन कर सकता है। रिटेल सेल्स में जजमेंट इमोशनल वैल्यू और ‘लोगों को छू लेने’ की कला है, जिसे AI नहीं बदल सकता। इंडस्ट्री 4.0 में मैकेनिकल असेंबली, इलेक्ट्रिकल वायरिंग, PLC प्रोग्रामिंग, डेटा एनालिसिस और प्रोडक्शन शेड्यूलिंग, सब एक साथ। यही है ‘एक विशेषज्ञता, कई क्षमताएं’।

चीन के 71 प्रतिभागी, औसत उम्र सिर्फ 21 साल, सभी 64 स्किल्स में उतरे हैं। शंघाई में 41.2 लाख कुशल कर्मी हैं, जिनमें 15.1 लाख उच्च-कौशल प्रतिभाएं यानी कुल कुशल कर्मियों का 36.8%. शहर ने बड़ा कदम उठाया है: उच्च-कौशल प्रतिभाएं, जिनमें वर्ल्डस्किल्स मेडलिस्ट भी शामिल हैं, अब सीधे स्थायी निवास के लिए आवेदन कर सकती हैं। यह डिग्री-आधारित मूल्यांकन से स्किल-आधारित मूल्यांकन की ओर ऐतिहासिक बदलाव है।

समापन समारोह रविवार, 27 सितंबर को शंघाई वर्ल्ड एक्सपो कल्चरल सेंटर में संदेश अभी साफ है। भविष्य इंसान बनाम मशीन का नहीं, इंसान के साथ मशीन का है। जो काम तय है, वह AI करेगा; जो अनकहा, अनिश्चित और जटिल है, वह इंसान करेगा। निर्णय, अनुकूलन और सिस्टम-लेवल सोच। शंघाई में खड़े 1,385 युवा हुनरमंदों के लिए यह सबक किसी भी मेडल से बड़ा हो सकता है।













