संभल : फर्जी पट्टे पर 38 बीघा जमीन के 101 करोड़ रुपये का मामला नगर पालिका के तत्कालीन चेयरमैन कौसर अहमद तक पहुंच गया है। मामले में 11 घंटे रिमांड पर रहे शाहजहांपुर के असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर (तत्कालीन EO) राजकुमार गुप्ता ने बताया कि यह फर्जीवाड़ा SP नेता आजम खान के करीबी कौसर अहमद के दबाव में हुआ था। उनके कहने पर 2013 में हाईकोर्ट से केस वापस ले लिया गया था। पूछताछ में सामने आए तथ्य और नाम सामने नहीं आए हैं।
नगर परिषद ने इस साल इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी
SP कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि रिमांड के दौरान राजकुमार से 100 से ज्यादा सवाल पूछे गए। असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर ने पूरे फर्जीवाड़े के लिए तत्कालीन चेयरमैन को जिम्मेदार ठहराया है। रिमांड पूरा होने के बाद मेडिकल जांच के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
वही सरकार ने 11 अगस्त 1954 को एक गजट जारी कर ग्राम तश्तपुर गोसाईं की लगभग 38 बीघे (5.06 एकड़) भूमि का प्रबंधन नगर पालिका परिषद, सम्भल को सौंप दिया। 1967 में तत्कालीन चेयरमैन चिरंजीलाल ने जमीन सैदुल रहमान के नाम कर दी। चिरंजीलाल का देहांत हो चुका है। 1995 में गांव चकबंदी प्रक्रिया में आया। 1997 में सैदुल ने जमीन नाम करने के लिए आवेदन किया। विभिन्न कार्यवाहियों के बीच 15 फरवरी 2008 को तत्कालीन उपनिदेशक चकबंदी खेम सिंह खड़क ने सैदुल के पक्ष में आदेश पारित किया।
नगर परिषद ने इस साल इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी
बता दे कि नगर परिषद ने इस साल इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी। इस समय हाजी नुसरत चेयरमैन थे। यह मामला हाई कोर्ट में पेंडिंग था। साल 2013 में, तत्कालीन चेयरमैन हकीम कौसर के कार्यकाल के दौरान EO राजकुमार गुप्ता ने याचिका वापस ले ली थी।
29 जुलाई को 32 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई
इस बीच ज़मीन बिक गई। 3 जून 2026 को डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट एडवोकेट ने डिप्टी डायरेक्टर चकबंदी (एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ज्यूडिशियल) ओमप्रकाश अंजोर के सामने रिवीजन पिटीशन दी। उन्होंने पिछला ऑर्डर कैंसल कर दिया और 27 जून को एडमिनिस्ट्रेशन ने ग्राम सभा को कब्ज़ा दे दिया। 29 जुलाई को 32 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। पुलिस के मुताबिक, रविवार को कौसर अहमद शहर में न होने की वजह से नहीं मिले। उन्हें जल्द ही बुलाकर पूछताछ की जाएगी।












