वाराणसी। सावन का पवित्र महीना 28 जुलाई से शुरू होने वाला है। सावन के पवित्र महीने की शुरुआत से ठीक पहले धर्म की नगरी काशी में ज्ञानवापी परिसर को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल वाराणसी में शिवसेना (शिंदे गुट) ने सावन के महीने में ज्ञानवापी परिसर में नमाज़ अदा करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की माँग की है। इसे लेकर पहले पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और अब शिवसेना के पदाधिकारियों ने सीएम योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री अमित शाह से नमाज को प्रतिबंधित किए जाने की मांग की है।

शिव सेना (शिंदे गुट) ने हिंदू आस्था को ठेस पहुंचने का हवाला…
ज्ञानवापी में सावन के महीने में नमाज पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग करने वाले शिवसेना के प्रवक्ता ओम प्रकाश मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृहमंत्री को एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने माँग की है कि पूरे सावन माह के दौरान ज्ञानवापी में नमाज़ पर प्रतिबंध लगाया जाए। इसे लेकर उन्होंने तर्क देते हुए कहा कि सावन के महीने में देश-विदेश से लाखों सनातन धर्मी काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए आते हैं। इस दौरान ज्ञानवापी परिसर (जिसे हिंदू पक्ष आदि विशेश्वर का मूल स्थान मानता है) में नमाज़ अदा होने से करोड़ों हिंदुओं की आस्था को गहरी चोट पहुंचती है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे मुस्लिम समुदाय को कोई आपत्ति नहीं होगी क्योंकि ज्ञानवापी परिसर में स्थित मां श्रृंगार गौरी के दर्शन के लिए मंदिर को वर्ष के एक विशेष अवसर पर खोला जाता है। ऐसे में मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी आगे आकर इसे स्वीकार करना चाहिए।
नमाज पर प्रतिबंध ना लगाए जाने पर बड़े आंदोलन की तैयारी में शिवसेना के कार्यकर्ता….
वाराणसी में शिवसेना ने सावन के महीने में ज्ञानवापी परिसर में नमाज अदा किए जाने के मुद्दे पर आक्रामक रुख अख्तियार किया है। प्रवक्ता ओम प्रकाश मिश्रा ने साफ तौर पर कहा है कि अगर प्रशासन और सरकार ने इस मांग पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो शिवसेना इस मुद्दे को लेकर एक बड़ा आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगी। गौरतलब है कि सावन के महीने में काशी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद संवेदनशील रहती है। ऐसे में शिवसेना की इस मांग और आंदोलन की चेतावनी के बाद स्थानीय प्रशासन के लिए भी बड़ी चुनौती होगी।


