Delhi: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट ने आज एक राष्ट्रव्यापी महत्व का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बराबर संवैधानिक दर्जा देने के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही अब राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बीच का संवैधानिक अंतर समाप्त हो गया है।
बता दें, सरकार के इस फैसले को प्रभावी बनाने के लिए ‘Prevention of Insults to National Honour Act’ (राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम) में महत्वपूर्ण संशोधन किया जाएगा। नए प्रावधानों के तहत, यदि कोई व्यक्ति ‘वंदे मातरम’ का जानबूझकर अपमान करता है या उसके गायन में बाधा डालता है, तो उसे 3 साल तक की जेल और भारी जुर्माने की सजा हो सकती है।
इस फैसले के बाद अब देश के सभी सरकारी कार्यक्रमों और संवैधानिक आयोजनों में राष्ट्रगान के साथ-साथ ‘वंदे मातरम’ का बजना भी अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि यह निर्णय राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने और देश के गौरवशाली इतिहास को सम्मान देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों की ओर से फिलहाल इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर भारी जनसमर्थन देखा जा रहा है।













