लखनऊ। राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद के इंजीनियरों की कार्यशैली और अवैध निर्माणों की पोल खोलकर रख दी है। प्रदेशभर में बड़ी संख्या में मानकों को ताक पर रखकर बने भवन मौजूद हैं और इन्हें ध्वस्त करने के आदेश वर्षों से फाइलों में दबे पड़े हैं, लेकिन न तो ये अवैध निर्माण गिराए जा रहे हैं और न ही संरक्षण देने वाले अभियंताओं की कोई जवाबदेही तय हो रही है।
कितने हैं अवैध निर्माण?
प्रदेशभर में विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद के रिकॉर्ड में कुल 4,32,188 अवैध निर्माण दर्ज हैं। इनमें से 31 मार्च तक 1,85,055 मामलों को निस्तारित करने का दावा किया गया है, लेकिन स्थिति यह है कि गिराने के आदेश के बाद भी 2.48 लाख से अधिक अवैध भवन आज भी खड़े हैं। सिर्फ राजधानी लखनऊ की बात करें तो यहां 25,190 अवैध निर्माण चिह्नित हैं, जिनमें से 23,408 भवनों को गिराए जाने के आदेश जारी हो चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि कई ध्वस्तीकरण आदेश तीन दशक से भी पुराने हैं—1992-93 के आदेशों पर भी आज तक अमल नहीं हुआ है।
कोर्ट की फटकार भी नहीं आई काम
वर्ष 2012 में दाखिल एक जनहित याचिका पर करीब तीन साल पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा था कि रिहायशी इलाकों में अवैध बहुमंजिला इमारतें और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स कैसे बनते रहे और संबंधित विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी? कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद प्राधिकरणों से 1 जनवरी 2012 से 31 दिसंबर 2024 तक के अवैध निर्माणों की रिपोर्ट मंगाई गई तो पता चला कि इन 13 वर्षों में ही 1,77,018 अवैध निर्माणों के खिलाफ वाद दायर किए गए और 83,998 भवनों को ध्वस्त करने के आदेश हुए, लेकिन असल में गिराए महज 11,677 ही गए। अधिकारियों और अभियंताओं की मिलीभगत का ही नतीजा है कि तीन साल में अवैध निर्माणों की संख्या तीन गुना बढ़कर 2,48,854 तक पहुंच गई है।
आवास विकास परिषद का हाल
आवास विकास परिषद ने विभिन्न शहरों की अपनी योजनाओं में 26,269 अवैध निर्माण चिह्नित किए हैं, जिनमें से 22,978 के ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए जा चुके हैं। लेकिन कागजी आदेशों पर अमल न होने का ही खामियाजा है कि पहले होटल लेवाना अग्निकांड और अब अलीगंज अग्निकांड ने 15 मासूमों की जान ले ली। आवास मंत्री का दायित्व भी संभाल रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्राधिकरण-परिषद के इंजीनियरों की मिलीभगत से हो रहे अवैध निर्माण के खेल पर अंकुश के तमाम निर्देश दिए हैं, लेकिन कोई भी कारगर साबित होता नहीं दिख रहा।
बसों में अग्निशमन यंत्रों की सघन जांच के आदेश
इस बीच, लखनऊ अग्निकांड के बाद परिवहन विभाग ने बसों में अग्नि सुरक्षा उपायों को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने प्रदेशभर में अगले 30 दिनों तक विशेष अभियान चलाकर स्लीपर बसों, स्कूल बसों, स्टेज कैरिज और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसों में अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता और कार्यशीलता की सघन जांच के निर्देश दिए हैं। 23 जुलाई तक चलने वाले इस अभियान के तहत अग्निशमन यंत्र न पाए जाने, कार्यशील न होने या उनकी वैधता समाप्त होने पर संबंधित बस को फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं दिया जाएगा और प्रवर्तन की कार्रवाई भी की जाएगी।



