Ayodhya : अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दानपात्रों से हुई करोड़ों रुपये की कथित चोरी के मामले में ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के बाद अब एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ट्रस्ट की ओर से कोतवाली में दर्ज कराई गई इस आपराधिक रिपोर्ट में कुल 8 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, लेकिन बेहद चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी सूची से ट्रस्ट के किसी भी बड़े या शीर्ष पदाधिकारी का नाम शामिल नहीं है। इस बड़े डेवलपमेंट के बाद अब यह तीखा सवाल हवा में तैरने लगा है कि क्या जांच एजेंसियां केवल निचले स्तर के कर्मचारियों और सेवादारों पर ही शिकंजा कसेंगी या फिर इस महा-घोटाले की स्क्रिप्ट लिखने वाले पर्दे के पीछे के बड़े मगरमच्छों तक भी कानून के हाथ पहुंचेंगे?

इन 8 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई क्रिमिनल FIR
प्रशासनिक और पुलिस सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राम मंदिर ट्रस्ट की शिकायत पर जिन 8 लोगों को इस वित्तीय हेराफेरी और आस्था से खिलवाड़ का मुख्य आरोपी बनाया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:

सुभाष

करुणेश

अविनाश शुक्ला

अनुकल्प मिश्रा

मनीष यादव

रामाशंकर मिश्रा

रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू

लवकुश मिश्रा

जांच के घेरे में ‘निचला स्टाफ’: प्राथमिक तौर पर सामने आए ये सभी नाम मंदिर परिसर की सुरक्षा, काउंटिंग (दानपेटी की गिनती) और प्रबंधन के निचले या मध्यम स्तर से जुड़े कर्मचारियों व बाहरी सहायकों के बताए जा रहे हैं।

बड़े पदाधिकारियों को बाहर रखने पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस एफआईआर के सार्वजनिक होते ही अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली के सियासी व धार्मिक हलकों में चर्चाएं और सवाल तेज हो गए हैं। जानकारों और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि रामलला के खजाने से इतने बड़े पैमाने पर और इतने लंबे समय तक कैश की चोरी बिना किसी ऊंचे रसूखदार प्रशासनिक या प्रबंधकीय संरक्षण के मुमकिन ही नहीं है।

मंदिर परिसर के भीतर जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता और चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी व सुरक्षा एजेंसियों का पहरा रहता है, वहां करोड़ों की नकदी गायब होती रही और बड़े पदाधिकारियों को भनक तक नहीं लगी, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है।

विशेष जांच दल इस मामले की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच में पहले से ही जुटी हुई है। लेकिन अब जब ट्रस्ट ने खुद आगे बढ़कर इन 8 लोगों को नामजद कर दिया है, तो पुलिस और एसआईटी की पूरी जांच की दिशा और नीयत पर सबकी निगाहें टिक गई हैं। देखना होगा कि क्या गिरफ्तारियों के बाद इन आरोपियों से होने वाली कड़ी पूछताछ में कुछ ऐसे राज उगलेंगे, जो मंदिर ट्रस्ट के बड़े कमरों में बैठे चेहरों की मुश्किलें बढ़ा दें, या फिर यह पूरी कार्रवाई सिर्फ इन ‘छोटी मछलियों’ की बलि देकर रफा-दफा कर दी जाएगी।

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