अयोध्या के भव्य रामलला मंदिर के दानपात्रों से करोड़ों रुपये के कथित चढ़ावा चोरी होने का मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक और सामाजिक रूप से गरमा चुका है। अयोध्या में विहिप की पांच दिवसीय बैठक स्थगित होने की खबरों के बीच, अब इस पूरे विवाद में विश्व हिंदू परिषद के शीर्ष नेतृत्व की बेहद आक्रामक एंट्री हुई है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने दिल्ली में इस मामले पर खुलकर अपनी बात रखी है और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और पूरे ट्रस्ट मैनेजमेंट को एक बड़ा झटका देते हुए इस पूरे प्रकरण में तुरंत एफआईआर दर्ज कर कानूनी जांच शुरू करने की पुरजोर वकालत की है।

‘FIR दर्ज करके रेगुलर जांच होना बेहद जरूरी’
विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने दोटूक शब्दों में कहा कि रामलला मंदिर के चढ़ावे में हुई इस कथित हेराफेरी के मामले को दबाया या छिपाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए तुरंत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए और एक रेगुलर पुलिसिया जांच की सख्त जरूरत है।” उन्होंने साफ किया कि केवल आंतरिक जांच से काम नहीं चलेगा, जब तक कानून अपना काम नहीं करेगा, तब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो पाएगा।

‘हिंदुओं की आस्था को गहरा धक्का लगा, लज्जा महसूस हुई’
आलोक कुमार ने इस घटना पर गहरी पीड़ा और आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि करोड़ों रामभक्तों ने अपनी गाढ़ी कमाई और अगाध श्रद्धा से रामलला के चरणों में दान अर्पित किया था। ऐसी पवित्र जगह से दान चोरी होने की खबर आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “इस पूरे प्रकरण से संपूर्ण हिंदू समाज और हिंदुओं की आस्था को गहरा धक्का लगा है। एक संगठन और एक हिंदू के नाते इससे हमें बेहद लज्जा महसूस हुई है।” विहिप के इस बेहद कड़े रुख के बाद अब राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर चौतरफा कानूनी और सामाजिक दबाव बढ़ गया है, जिससे आने वाले दिनों में अयोध्या से लेकर दिल्ली तक की हलचल और तेज होना तय है।

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