Ayodhya : श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दानपात्रों से करोड़ों रुपये के कथित गबन मामले में हर दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। विशेष जांच दल के सक्रिय होने के बाद इस पूरे खेल में एक ‘संगठित गिरोह’ के शामिल होने की बात सामने आ रही है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह गबन किसी एक व्यक्ति की निजी करतूत नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत पूरे नेटवर्क द्वारा इस काम को अंजाम दिया जा रहा था, जिसमें हर खिलाड़ी की भूमिका पहले से तय थी।

कौशलपुरी के गोपनीय ठिकाने पर होता था बंटवारा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दानपात्रों से चढ़े हुए रुपयों को एक साथ गायब करने के बजाय बेहद शातिर तरीके से धीरे-धीरे बाहर निकाला जाता था ताकि किसी को भनक न लग सके। रकम चोरी करने के बाद उसे सीधे बाजार में ले जाने के बजाय पहले एक सुरक्षित और गोपनीय स्थान पर छिपाया जाता था। दावा किया जा रहा है कि इसके बाद अयोध्या के कौशलपुरी इलाके में स्थित एक सीक्रेट ठिकाने पर इस काली कमाई का आपस में बंटवारा किया जाता था। गिरोह में यह तय था कि कौन रकम निकालेगा, कौन उसे ठिकाने लगाएगा और किसे कितना हिस्सा मिलेगा।

रिश्तेदारों के बैंक खाते और निवेश के साक्ष्य खंगाल रही पुलिस
अब तक हुई जांच में गबन की गई अनुमानित राशि का बेहद छोटा हिस्सा ही बरामद हो पाया है, जिसने जांचकर्ताओं को भी हैरान कर दिया है। यही वजह है कि एसआईटी अब संदिग्ध ट्रस्ट कर्मियों के साथ-साथ उनके परिवार और करीबी रिश्तेदारों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, हालिया निवेश और खरीदी गई संपत्तियों की कुंडली खंगाल रही है। पुलिस को शक है कि चोरी की बड़ी रकम को रिश्तेदारों के खातों और प्रॉपर्टी में खपाया गया है। इसके साथ ही सबसे बड़ा फोकस इस बात पर है कि इन संदिग्ध कर्मचारियों को ट्रस्ट के किस रसूखदार पदाधिकारी का मूक संरक्षण प्राप्त था।

SIT जांच से पहले ट्रस्टी गायब, चंपत राय बीमार, अनिल मिश्रा भी अयोध्या से बाहर।

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