21 अप्रैल को हुए पहलागाम आतंकी हमले की बरसी पर शहीद शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्या का दर्द छलक पड़ा। इस हमले में शुभम की मौत हो गई थी, और उनके परिवार की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। ऐशान्या ने इस घटना पर अपनी भावनाओं को साझा करते हुए कहा कि यह बदलाव ऐसा था जिसे वह अपने सबसे बड़े दुश्मन के साथ भी नहीं चाहती थीं। इस घटना ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था, लेकिन आज वह इसे अपनी ताकत मानते हुए अपनी बात सामने रख पा रही हैं।

शुभम की पत्नी ऐशान्या का दर्द

पहलागाम हमले के बाद, शुभम की पत्नी ऐशान्या का जीवन पूरी तरह से बदल गया था। उन्होंने कहा, “इस घटना के बाद की जिंदगी को मैं अपने सबसे बड़े दुश्मन के साथ भी नहीं चाहूंगी। जिस समय मैंने अपने जीवनसाथी को गोलियों से घायल होते देखा, वह दृश्य मेरे जीवन से कभी नहीं जाएगा। मेरे पास इस दर्द को भूलने का कोई रास्ता नहीं है।”

उन्होंने बताया कि यह दुख इतना गहरा था कि बोलने और खुद को संभालने की भी ताकत नहीं बची थी। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इस दर्द को अपनी ताकत में बदल लिया। वह आज अपने परिवार और शुभम के बारे में खुलकर बात कर पा रही हैं। ऐशान्या ने कहा, “यह दर्द मुझे बोलने की हिम्मत देता है। अगर आज मैं बोल पा रही हूं, तो सिर्फ इस दर्द को अपनी ताकत बनाकर।”

सामाजिक समर्थन और श्रद्धांजलि

ऐशान्या ने यह भी कहा कि जब लोग उनसे मिलने आते हैं, तो वे केवल श्रद्धांजलि देने आते हैं और शुभम के बारे में पूछते हैं। उन्होंने बताया कि इस दुःख में किसी ने भी राजनीति नहीं घुसाई, यह एक सकारात्मक पहलू था। “यह अच्छा है कि लोग हमसे मिलने के लिए आ रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई भी राजनीति या व्यक्तिगत उद्देश्य नहीं है। सभी लोग हमारे परिवार का हाल जानने और शुभम को श्रद्धांजलि देने के लिए आते हैं।”

आत्मविश्वास और प्रेरणा

अपने निजी जीवन में बदलाव के बारे में बात करते हुए ऐशान्या ने कहा, “शादी के कुछ ही महीनों बाद मेरी जिंदगी में जो बदलाव आया, वह किसी के साथ नहीं होना चाहिए। लेकिन अब मुझे लगता है कि यह बदलाव मेरी ताकत बन चुका है। मैं इसे अपने जीवन के हर हिस्से में लेकर चल रही हूं। यह दर्द मुझे बोलने और लोगों से अपने विचार साझा करने की हिम्मत देता है।”

समाज के लिए एक प्रेरणा

ऐशान्या का यह बयान न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी है, बल्कि यह उन सभी लोगों के लिए भी प्रेरणा है जो किसी बड़ी त्रासदी का सामना कर चुके हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि जीवन में आने वाली कठिनाइयों को अपनी ताकत बना कर किसी भी स्थिति का सामना किया जा सकता है।

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