बिहार के भोजपुर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने मृत्यु के प्रति लोगों के नजरिए को बदल कर रख दिया है। अमूमन जहां मौत के बाद घरों में मातम छा जाता है, वहीं शाहपुर नगर पंचायत के दिलमपुर में एक परिवार ने अपनी बुजुर्ग दादी की अंतिम विदाई को किसी ‘राजसी उत्सव’ की तरह मनाया। लग्जरी गाड़ियां, आसमान में उड़ते 100 से ज्यादा ड्रोन, और दर्जनों बैंड-बाजे—यह नजारा किसी शादी की बारात का नहीं, बल्कि 100 साल के करीब पहुंच चुकीं कौशल्या देवी की अंतिम यात्रा का था।

पूरे सम्मान के साथ ‘विजय प्रस्थान’

शाहपुर प्रखंड के निवासी डॉ. जनार्दन पांडेय की पत्नी कौशल्या देवी का निधन हुआ, तो परिवार ने आंसू बहाने के बजाय उनके सफल और संतुष्ट जीवन का सम्मान करने का निर्णय लिया। परिजनों का तर्क था कि दादी ने अपनी सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियां बखूबी निभाईं और एक खुशहाल भरा-पूरा कुनबा पीछे छोड़ा है। ऐसे में उनकी विदाई शोक में डूब कर नहीं, बल्कि उनकी जीवन यात्रा की सफलता के जश्न के रूप में होनी चाहिए। इसे परिवार ने ‘विजय यात्रा’ का नाम दिया।

सड़कों पर दिखा अद्भुत नजारा

जब शव यात्रा शुरू हुई, तो पूरा इलाका थम सा गया। शव वाहन के आगे-आगे डीजे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर लोग थिरक रहे थे। इस अलौकिक दृश्य को शूट करने के लिए 2 दर्जन से ज्यादा वीडियोग्राफर तैनात थे, वहीं आसमान से पुष्प वर्षा और निगरानी के लिए ड्रोन का काफिला चल रहा था। 15 से ज्यादा बैंड पार्टियों की धुन ने माहौल को पूरी तरह भक्ति और उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया।

प्रेरणा बनी यह सोच

इस अनोखी विदाई को देखने के लिए सड़कों पर हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना समाज को एक बड़ा संदेश देती है। जब कोई व्यक्ति अपनी पूरी आयु जीकर और कर्तव्यों को पूरा कर दुनिया से जाता है, तो वह दुख का नहीं, बल्कि उस आत्मा के सफल सफर के अभिनंदन का वक्त होता है। शाहपुर में निकली यह शव यात्रा अब पूरे बिहार में चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जिसे ‘परंपरा से हटकर एक नई क्रांति’ माना जा रहा है।

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