नई दिल्ली: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली और पेपर लीक की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट’ के संशोधित संस्करण (एंटी-पेपर लीक बिल) को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पूरी तरह पारदर्शिता लाना और नकल माफियाओं के हौसलों को पूरी तरह पस्त करना है।
नए संशोधित प्रावधानों के तहत, पेपर लीक या अन्य संगठित अनुचित साधनों में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए 10 साल तक की कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए जुर्माने की राशि को बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है। कानून के दायरे में केवल सॉल्वर गैंग या व्यक्ति ही नहीं, बल्कि इस तरह की गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वाले कोचिंग सेंटर्स पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
इस बिल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा, जिन्हें मात्र 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने का अधिकार होगा। सरकार आगामी संसद सत्र में इस विधेयक को विचार और पारित कराने के लिए पेश करने की तैयारी में है। जानकारों का मानना है कि इस सख्त कानून के लागू होने से देश के लाखों-करोड़ों युवाओं और छात्रों के भविष्य को सुरक्षा मिलेगी तथा परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता फिर से बहाल होगी।















