लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज है। इसी बीच कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने अपने समाज के लोगों से एकजुट रहने और सतर्क रहने का आह्वान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर फूलन देवी की हत्या का जिक्र करते हुए अपने समुदाय को सावधान रहने की सलाह दी।
‘चुनावी सीजन आ गया है, बरसाती मेंढक कूदने लगे’
संजय निषाद ने अपने पोस्ट में चुनाव के दौरान निषाद और मछुआरा समुदाय के बीच सक्रिय होने वाले नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने ऐसे नेताओं को ‘बरसाती मेंढक’ और ‘बहरुपिया’ बताते हुए लिखा कि जो लोग साढ़े चार साल तक समाज के सुख-दुख में नहीं आए, वे अब चुनावी मौसम में पंचायत के बहाने लोगों के आसपास नजर आने लगे हैं।
उन्होंने मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझी समेत मछुआरा समुदाय से सतर्क रहने की अपील की।
फूलन देवी हत्याकांड का जिक्र कर साधा निशाना
संजय निषाद ने अपने पोस्ट में फूलन देवी की हत्या का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा, जिन्होंने फूलन देवी की हत्या करवाकर मछुआरा समाज की अलग राजनीति को खड़ा होने से रोकने का प्रयास किया।
फूलन देवी की 25 जुलाई 2001 को दिल्ली स्थित उनके आवास के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दिल्ली की अदालत ने 2014 में शेर सिंह राणा को हत्या के मामले में दोषी ठहराया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
‘फूलन देवी की राजनीतिक विरासत छीनने का प्रयास’
संजय निषाद ने अपने पोस्ट में दावा किया कि कुछ राजनीतिक ताकतों ने फूलन देवी की हत्या की सुपारी दी थी और उनकी संपत्ति पर कब्जा किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने फूलन देवी की राजनीतिक विरासत को मछुआरा समुदाय से छीनने का प्रयास किया, वह मछुआरों का भला चाहने वाली पार्टी नहीं हो सकती।
ये दावे संजय निषाद की राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा हैं। फूलन देवी हत्याकांड में अदालत के 2014 के फैसले में शेर सिंह राणा को दोषी ठहराया गया था, जबकि अन्य आरोपियों को अलग-अलग आरोपों में राहत मिली थी।
‘मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं’
संजय निषाद ने अपने पोस्ट के अंत में निषाद पार्टी को मछुआरा समाज की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के तौर पर पेश किया। उन्होंने लिखा कि मछुआरे दरी बिछाने वाली कौम नहीं हैं, बल्कि OBC समाज के हक के लिए लड़ने वाली कौम हैं।
उन्होंने अपने समाज के लोगों से चुनावी मौसम में सक्रिय होने वाले नेताओं से सावधान रहने की अपील की।
सपा के दावों पर संजय निषाद का पलटवार
संजय निषाद का यह बयान ऐसे समय आया है जब समाजवादी पार्टी की ओर से निषाद समाज को लेकर अपने शासनकाल के कामों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का दावा किया जाता रहा है। सपा की ओर से फूलन देवी का उदाहरण देते हुए उनके राजनीतिक सफर का भी उल्लेख किया जाता रहा है।
वहीं, संजय निषाद लगातार निषाद समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर सपा के दावों पर सवाल उठाते रहे हैं। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले निषाद और मछुआरा समुदाय को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है।














