उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले से सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार को उजागर करने वाली एक दुखद तस्वीर सामने आई है। मंझनपुर स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने आए मूकबधिर (बोलने और सुनने में असमर्थ) आवेदकों से रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगा है।

पीड़ितों का कहना है कि दफ्तर में तैनात एक बाबू प्रमाण पत्र जारी करने के एवज में प्रत्येक आवेदक से 2-2 हजार रुपये की मांग कर रहा है। रिश्वत की रकम न देने के कारण कई गरीब और बेबस मूकबधिर आवेदक पिछले एक साल से दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। दर्जनों पीड़ित कभी कौशाम्बी जिला अस्पताल तो कभी प्रयागराज तक दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

परेशान होकर दर्जनों मूकबधिर आवेदक सीएमओ कार्यालय पहुंचे और अपनी बेबसी पर कड़ा विरोध जताया। इस दौरान साइन लैंग्वेज (इशारों की भाषा) की ट्रांसलेटर राबिया ने मूकबधिरों से बातचीत कर उनकी बात मीडिया और अधिकारियों तक पहुंचाई। ट्रांसलेटर के जरिए पीड़ितों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पीड़ित अब जिलाधिकारी (DM) से शिकायत कर दोषी बाबू के खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि निचले स्तर पर भ्रष्टाचार किस कदर हावी है।

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