बांग्लादेश इस समय गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। राजधानी ढाका और आसपास के ग्रामीण इलाकों में कई घंटों तक बिजली कटौती हो रही है। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी के कारण बांग्लादेश के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा कोयला और गैस खरीदना मुश्किल हो गया है।
ऐसे हालात में बांग्लादेश ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से अतिरिक्त बिजली और डीजल आपूर्ति की मांग की है। भारत पहले से ही बांग्लादेश को बड़ी मात्रा में बिजली निर्यात करता है।
बांग्लादेश को सबसे ज्यादा बिजली देता है भारत
भारत से बिजली खरीदने वाले देशों में बांग्लादेश सबसे बड़ा ग्राहक है। दोनों देशों के बीच हुए समझौतों के तहत भारत करीब 2000 से 2650 मेगावॉट तक बिजली बांग्लादेश को उपलब्ध कराता है।
भारत बिजली निर्यात से हर साल करीब 1.1 से 1.2 अरब डॉलर यानी लगभग 9 से 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई करता है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा बांग्लादेश से आता है।
अडानी पावर समेत कई कंपनियां करती हैं सप्लाई
बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति में भारतीय कंपनियों की बड़ी भूमिका है। झारखंड के गोड्डा स्थित अडानी पावर प्लांट से बांग्लादेश को बड़ी मात्रा में बिजली भेजी जाती है।
इसके अलावा PTC India, Sembcorp और NTPC विद्युत व्यापार निगम (NVVN) जैसी कंपनियां भी पावर परचेज एग्रीमेंट के तहत बांग्लादेश को बिजली उपलब्ध कराती हैं।
हालांकि, बांग्लादेश की ओर से बिजली बिलों के भुगतान में देरी के कारण कुछ समय से सप्लाई व्यवस्था पर असर पड़ा है।
नेपाल के साथ दोतरफा बिजली व्यापार
भारत और नेपाल के बीच बिजली कारोबार दोनों तरफ चलता है। सर्दियों में नेपाल में जलस्तर कम होने से हाइड्रोपावर उत्पादन घट जाता है, तब नेपाल भारत से बिजली खरीदता है।
वहीं मानसून के दौरान जब नेपाल में ज्यादा बिजली बनती है, तो वह अतिरिक्त बिजली भारत को बेचता है। हाल के वर्षों में नेपाल ने भारत को बिजली निर्यात कर अच्छी कमाई की है।
भूटान से भारत खरीदता है हाइड्रोपावर
भूटान के साथ भारत का ऊर्जा संबंध मुख्य रूप से जलविद्युत पर आधारित है। भारत की मदद से विकसित कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं से भूटान अतिरिक्त बिजली भारत को बेचता है।
गर्मी और मानसून के दौरान भूटान से भारत को ज्यादा बिजली मिलती है, जबकि सर्दियों में जरूरत पड़ने पर भूटान भारत के ग्रिड से बिजली लेता है।
श्रीलंका और म्यांमार के साथ भी बढ़ रहा ऊर्जा सहयोग
भारत म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों को सीमित मात्रा में बिजली उपलब्ध कराता है। वहीं श्रीलंका के साथ समुद्र के नीचे ट्रांसमिशन केबल के जरिए पावर कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है।
दक्षिण एशिया में भारत अब सिर्फ बिजली उत्पादन करने वाला देश नहीं, बल्कि क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो रहा है।















