इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के सरकारी फैसले पर रोक लगाने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का फैसला असंवैधानिक है।
‘असंवैधानिक फैसले की सजा क्या होगी?’
अखिलेश यादव ने बयान जारी करते हुए कहा कि अब जनता यह सवाल पूछ रही है कि असंवैधानिक निर्णय लेने की सजा क्या होती है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणी ने सरकार के फैसले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रधानों को लेकर जताई चिंता
सपा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार के आदेश के बाद ग्राम प्रधानों में नए कार्य कराने की उम्मीद जगी थी और उन्होंने जनता से कई वादे भी किए थे। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद लोगों के बीच गलत संदेश जाएगा और इसका असर ग्राम प्रधानों की छवि पर पड़ सकता है।
खर्च और बजट को लेकर भी उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने कहा कि प्रधानों में इस बात की भी चिंता है कि बीच के समय में हुए खर्च का क्या होगा। उन्होंने आशंका जताई कि यदि उस अवधि को कानूनी रूप से अमान्य माना गया तो खर्च किए गए धन को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी। अदालत ने प्रथम दृष्टया इस फैसले को असंवैधानिक माना है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की गई है।
फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष सरकार के फैसले को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि मामले की अगली सुनवाई पर भी सभी की नजर बनी हुई है।














