उत्तर प्रदेश की 10 सीटों पर होने जा रहे द्विवार्षिक राज्यसभा चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने आठ प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। घोषित उम्मीदवारों में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाला और राजनीतिक गलियारों को चौंकाने वाला नाम संगठन के निष्ठावान नेता गोपी कृष्ण पांडेय का है।
गोपी कृष्ण पांडेय लंबे समय से बीजेपी संगठन में एक समर्पित और लो-प्रोफाइल कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत रहे हैं। वे पार्टी के किसान मोर्चा से लंबे समय तक जुड़े रहे और कई राज्यों में किसान मोर्चा के प्रभारी के रूप में अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों और मीडिया की चकाचौंध से दूर रहने वाले गोपी कृष्ण पांडेय का नाम उम्मीदवार घोषित होने से पहले तक कभी चर्चा में नहीं आया था। यही वजह है कि उनके नाम के ऐलान ने न सिर्फ आम जनता, बल्कि बीजेपी के आंतरिक हलकों को भी खासा हैरान किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहां ब्राह्मण चेहरे के तौर पर हरीश द्विवेदी या पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी जैसे हाई-प्रोफाइल चेहरों के नाम की जोरदार चर्चाएं चल रही थीं, वहीं बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने जमीनी कार्यकर्ता को तरजीह देकर संगठन में अनुशासन और समर्पण का बड़ा संदेश दिया है। हाल ही में वरिष्ठ ब्राह्मण नेता डॉ. दिनेश शर्मा को राज्यपाल बनाए जाने के बाद गोपी कृष्ण पांडेय को राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है।
उत्तर प्रदेश की कुल 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहा है। बीजेपी ने अपने आठ प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, जिनमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। उधर, समाजवादी पार्टी की ओर से प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवाणी को प्रत्याशी बनाया गया है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर है और मतदान 16 अक्टूबर को कराया जाएगा।



