प्रयागराज में लगातार बारिश के कारण हुए जलभराव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रयागराज प्रशासन को निर्देश दिया है कि मोरी गेट और दारागंज समेत जलभराव वाले निचले इलाकों से 24 से 48 घंटे के भीतर पानी निकालकर स्थिति सामान्य की जाए।
हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को आदेश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी
बता दे कि जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह आदेश उस समय दिया जब नगर आयुक्त ने दारागंज क्षेत्र में पाइपलाइन के जरिए पानी निकालने में आ रही समस्याओं की जानकारी कोर्ट को दी। कोर्ट ने कहा कि बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस चुका है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। वही हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को आदेश के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी है। साथ ही प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी गई है।
जलभराव के कारण न्यायाधीशों को भी अदालत पहुंचने में परेशानी हो रही
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के स्थानीय निकाय निदेशक से हलफनामा दाखिल करने को कहा है, जिसमें प्रयागराज को भविष्य में जलभराव से बचाने की योजना का पूरा विवरण देना होगा। यह हलफनामा 20 अगस्त को दाखिल किया जाना है। इससे पहले हाईकोर्ट ने प्रयागराज में लगातार बारिश से हुए जलभराव पर स्वत: संज्ञान लिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि जलभराव के कारण न्यायाधीशों को भी अदालत पहुंचने में परेशानी हो रही है और सुनवाई प्रभावित हो रही है।
मामले में नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा कोर्ट में पेश हुए। नगर आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि जलभराव की समस्या के समाधान के लिए एक “संपूर्ण योजना” तैयार की गई है।











