बिहार राज्य महिला आयोग ने मंगलवार को पूर्णिया के सांसद, पप्पू यादव द्वारा महिलाओं के बारे में दिए गए विवादित बयान पर स्वतः संज्ञान लिया और उन्हें कड़ा नोटिस जारी किया। यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें उन्होंने राजनीति में महिलाओं की स्थिति पर घिनौनी टिप्पणी की थी।

बता दें, आयोग ने पप्पू यादव की टिप्पणी को “घिनौना” और महिलाओं की गरिमा का अपमान बताते हुए, उन्हें तीन दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है। आयोग ने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि यदि यादव अपने बयान का उचित जवाब नहीं देते हैं, तो उनकी लोकसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की जाएगी। आयोग ने नोटिस में कहा, “आपको निर्देश दिया जाता है कि इस घिनौनी टिप्पणी पर एक साफ और तर्कसंगत जवाब इस पत्र के प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर दिया जाए।”

बता दें, यह कार्रवाई पप्पू यादव द्वारा दिए गए बयान के बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “राजनीति में आने वाली महिलाएं केवल जाने-माने नेताओं के साथ बिस्तर शेयर करके तरक्की करती हैं।” इस बयान को महिला आयोग ने महिलाओं के आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। आयोग ने कहा कि इस प्रकार के बयान पॉलिटिकल फील्ड में महिलाओं को केवल उनकी काबिलियत से नहीं, बल्कि असम्मानजनक तरीके से पेश करता है।

इससे पहले, पप्पू यादव ने महिला रिजर्वेशन अमेंडमेंट बिल के बारे में बोलते हुए यह भी कहा था कि “भारत में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया जाता है, लेकिन उनकी कभी इज्जत नहीं की जाती।” उन्होंने यह आरोप लगाया कि 90% महिलाएं नेताओं के कमरे में जाए बिना राजनीति में कुछ नहीं कर सकतीं। यह बयान भी विवाद का कारण बना।

महिला आयोग के नोटिस के बाद, पप्पू यादव के बयान को लेकर राजनीति में हलचल मच गई है। कई राजनीतिक दलों ने उनकी टिप्पणी की आलोचना की है, और महिलाओं के सम्मान के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

बिहार महिला आयोग की इस कार्रवाई ने पप्पू यादव के बयान पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आयोग की कड़ी प्रतिक्रिया ने साफ कर दिया है कि महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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