पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से सामने आए शेखूपुरा के एक सनसनीखेज मामले ने देश की न्याय व्यवस्था और पुलिस अधिकारियों को मिलने वाली छूट पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने इस मामले को जोर-शोर से उठाते हुए पाकिस्तान के एंटी-टॉर्चर कानूनों की गंभीर कमियों और प्रशासनिक विफलता को उजागर किया है। यह मामला 2023 का है, जब अधिकारियों ने आखिरकार यह माना कि दो लोग, जिन्हें उनके परिवारों द्वारा लंबे समय से लापता बताया जा रहा था, वे शेखूपुरा में एक पुलिस “एनकाउंटर” में मारे गए थे और उनके परिजनों को बिना बताए चुपचाप उन्हें दफना दिया गया था।
ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सिलसिलेवार पोस्ट के जरिए इस पूरे प्रकरण को देश के जवाबदेही सिस्टम पर एक बड़ा तमाचा बताया है। चौंकाने वाली बात यह है कि सुरैया बीबी बनाम रीजनल पुलिस ऑफिसर शेखूपुरा नामक इस मामले को खुद पाकिस्तान सरकार ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के सामने हिरासत में होने वाले दुर्व्यवहार को रोकने की अपनी प्रगति के रूप में पेश किया था। हालांकि, मानवाधिकार संस्था का तर्क है कि इस मामले के तथ्य देश के खोखले न्याय तंत्र और सिस्टम की गंभीर कमियों की पोल खोलते हैं।
शिकायतकर्ता सुरैया बीबी ने साल 2023 में लाहौर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और अपने लापता जीजा व भतीजे के बारे में जानकारी मांगी थी, जिन्हें कथित तौर पर पुलिस हिरासत में लिया गया था। लंबी कानूनी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने स्वीकार किया कि दोनों व्यक्तियों को तीन महीने पहले ही एक तथाकथित मुठभेड़ में मार दिया गया था। पाकिस्तानी कानून के मुताबिक एनकाउंटर में होने वाली हर मौत की तुरंत और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, और हिरासत में प्रताड़ना के मामलों को फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) को सौंपा जाना चाहिए। लेकिन इस मामले में किसी भी तय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
घटना के दो साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो कोई ठोस जांच पूरी हुई है, न ही कोई औपचारिक मुकदमा शुरू किया गया और न ही किसी दोषी अधिकारी को जवाबदेह ठहराया गया है। HRCP का दावा है कि 2022 में पाकिस्तान के टॉर्चर एंड कस्टोडियल डेथ (प्रिवेंशन एंड पनिशमेंट) एक्ट के लागू होने के बाद से इस कानून के तहत किसी भी एफआईए जांच में एक भी अधिकारी को सजा नहीं मिल पाई है। यह मामला साफ दिखाता है कि कानूनी सुरक्षा उपायों के बावजूद पाकिस्तान में फर्जी एनकाउंटर और पुलिस की मनमानी बेरोक-टोक जारी है।














