संसद के विशेष सत्र से पहले परिसीमन (Delimitation) को लेकर देश की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। खासकर दक्षिण भारत के राज्यों में इस प्रस्ताव के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे राज्यों के साथ “ऐतिहासिक अन्याय” बताया है।
स्टालिन का केंद्र सरकार को कड़ा संदेश
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार परिसीमन संशोधन लागू करती है, तो यह दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश की प्रगति में योगदान देने की यही सजा है।
स्टालिन ने आगे ऐलान किया कि इस प्रस्ताव के विरोध में पूरे तमिलनाडु में काले झंडे लगाए जाएंगे और सार्वजनिक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
काले झंडे दिखाकर विरोध का ऐलान
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से अपील की है कि वे घरों और सार्वजनिक स्थानों पर काले झंडे लगाकर विरोध दर्ज करें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार इस फैसले पर आगे बढ़ती है, तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम सामने आ सकते हैं।
संसद का विशेष सत्र क्यों है अहम
16 अप्रैल से शुरू होने वाला तीन दिवसीय विशेष सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सत्र में केंद्र सरकार का मुख्य फोकस नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधन को पारित कराना है।
इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है।
परिसीमन और महिला आरक्षण का संबंध
महिला आरक्षण को लागू करने के लिए पहले देश में जनगणना और उसके आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। इसी कारण परिसीमन विधेयक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लोकसभा सीटों में बड़ा बदलाव संभव
सरकार की योजना के अनुसार, परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर लगभग 850 तक हो सकती है। इनमें अधिकांश सीटें राज्यों को और कुछ सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को मिल सकती हैं।
विपक्ष भी सक्रिय, रणनीति बैठक जारी
इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी अपनी रणनीति तेज कर दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है, जिसमें परिसीमन, महिला आरक्षण और सीटों की संभावित बढ़ोतरी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
विपक्ष का लक्ष्य संसद में एकजुट होकर सरकार की नीतियों का विरोध करना है।
केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करना जरूरी है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजु ने कहा है कि यह एक ऐतिहासिक कदम है और इसमें देरी नहीं होनी चाहिए।
परिसीमन विधेयक 2026 क्या है?
परिसीमन विधेयक 2026 का उद्देश्य नई जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं और संख्या का पुनर्निर्धारण करना है। इसके लिए एक नया परिसीमन आयोग गठित किया जाएगा।
आयोग का गठन कैसे होगा
प्रस्तावित आयोग में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को अध्यक्ष बनाया जाएगा। इसके अलावा मुख्य चुनाव आयुक्त और राज्य चुनाव आयोग के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे।
आगे की प्रक्रिया क्या होगी
यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा। आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा और सरकार की मंजूरी के बाद नई चुनावी व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।












