वाराणसी। पूर्वांचल की राजनीति और जरायम की दुनिया से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक, धनंजय सिंह जानलेवा हमला केस में आज विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के विधायक अभय सिंह और विनीत सिंह समेत सभी आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह घटना 4 अक्टूबर 2002 की है, जब तत्कालीन विधायक और पूर्व सांसद धनंजय सिंह अपने साथियों के साथ सफारी गाड़ी से वाराणसी से जौनपुर लौट रहे थे। कैंट थाना क्षेत्र के नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा हॉल के पास उनके वाहन पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी। इस दुस्साहसिक हमले में धनंजय सिंह, उनके अंगरक्षक और चालक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। धनंजय सिंह ने इस मामले में अभय सिंह और उनके सहयोगियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था।
24 साल का लंबा इंतजार
यह मामला वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट के सबसे पुराने लंबित केसों में से एक था।
- लंबी सुनवाई: साल 2003 से सत्र न्यायालय में लंबित इस मामले में दोनों पक्षों के साक्ष्य 2021 में ही पूरे हो गए थे।
- हाईकोर्ट का दखल: इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के कारण अंतिम फैसले पर रोक लगी हुई थी, जिसके हटने के बाद आज जस्टिस यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने फैसला सुनाया।
- गैंगस्टर केस में पहले ही मिली राहत: इससे पहले 29 अगस्त 2025 को अपर जिला जज की अदालत ने इसी घटना से जुड़े गैंगस्टर एक्ट के मामले में संदीप सिंह, संजय सिंह और विनोद सिंह समेत अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था।
कोर्ट का रुख
बचाव पक्ष के अधिवक्ता स्वामीनाथ यादव और वरुण प्रताप सिंह ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता सबूत पेश करने में विफल रहा है। अदालत ने लिखित बहस और विधि व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के बाद सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश की राजनीति के दो दिग्गज धनंजय सिंह और अभय सिंह के बीच चली आ रही कानूनी लड़ाई के एक बड़े अध्याय का अंत हो गया है। फैसले के वक्त कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।














