नई दिल्ली। देश के निजी क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान उन ग्राहकों से करीब 5000 करोड़ रुपये चार्ज के रूप में वसूल लिए, जो अपने बचत या चालू खाते में तय न्यूनतम औसत बैलेंस नहीं रख पाए थे। मंगलवार को संसद में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, निजी बैंकों ने इस मद में कुल 4,948.71 करोड़ रुपये का चार्ज जमा किया।
सरकारी बैंकों से दोगुनी है निजी बैंकों की वसूली
राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि इसी अवधि के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) ने न्यूनतम बैलेंस की शर्तों से जुड़े चार्ज के तौर पर 2,137.92 करोड़ रुपये जमा किए। इसका साफ मतलब है कि निजी बैंकों द्वारा वसूली गई यह राशि सरकारी बैंकों के मुकाबले दोगुनी से भी अधिक रही।
HDFC और एक्सिस बैंक की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों पर नजर डालें तो निजी बैंकों में सबसे ज्यादा वसूली एचडीएफसी बैंक ने की, जिसने 1,798.14 करोड़ रुपये चार्ज के रूप में लिए। इसके बाद एक्सिस बैंक का नंबर रहा, जिसने 1,081.33 करोड़ रुपये वसूले। इन दोनों बैंकों ने मिलकर कुल 2,879.47 करोड़ रुपये जमा किए, जो 19 निजी बैंकों की पूरी वसूली का करीब 58 प्रतिशत बैठता है।
किन खातों पर नहीं लगता कोई जुर्माना?
सरकार ने यह भी साफ किया है कि बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट और प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए खातों में न्यूनतम बैलेंस न रहने पर किसी तरह का कोई जुर्माना नहीं लगाया जाता। एक अन्य जवाब में मंत्री ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी बैंकों की आर्थिक सेहत में जबरदस्त सुधार हुआ है, उनकी बैलेंस शीट पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है और मुनाफा ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया है। साथ ही, सरकारी बैंकों का ग्रॉस एनपीए कई दशकों के सबसे निचले स्तर पर आ गया है।















