डेस्क : अक्सर देर रात तक जागने या पर्याप्त नींद न लेने के बाद अगले दिन थकान, ध्यान लगाने में परेशानी और छोटी-छोटी बातें भूलने जैसी समस्याएं महसूस होती हैं। नींद का सीधा संबंध दिमाग की कार्यक्षमता और याददाश्त से है। ऐसे में एक नई रिसर्च ने इस बात पर ध्यान खींचा है कि नींद की कमी के बावजूद थोड़ी देर की शारीरिक गतिविधि याददाश्त से जुड़ी कुछ क्षमताओं को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है।
इस अध्ययन में पाया गया कि लंबे समय तक जागने के बाद 20 मिनट की एरोबिक एक्सरसाइज करने वाले लोगों ने नई जानकारी पहचानने के परीक्षण में उन लोगों से बेहतर प्रदर्शन किया, जिन्होंने कोई एक्सरसाइज नहीं की। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि थोड़ी देर की नींद से भी ऐसा ही लाभ देखने को मिल सकता है।
30 घंटे तक जागने के बाद किया गया अध्ययन
Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS) में प्रकाशित इस शोध में 18 से 35 वर्ष की उम्र के 53 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को 30 घंटे तक जागने के बाद तीन समूहों में बांटा गया।
पहले समूह के लोगों ने 20 मिनट तक एरोबिक एक्सरसाइज की। दूसरे समूह को 90 मिनट की नैप लेने का अवसर दिया गया, जबकि तीसरे समूह के प्रतिभागी एक्सरसाइज बाइक पर बैठे, लेकिन उन्होंने शारीरिक व्यायाम नहीं किया।
इसके बाद प्रतिभागियों की नई तस्वीरों को पहचानने की क्षमता का परीक्षण किया गया। परिणामों में एक्सरसाइज करने वाले समूह ने 56 प्रतिशत और नैप लेने वाले समूह ने 57 प्रतिशत सही पहचान दर्ज की। वहीं, बिना एक्सरसाइज वाले समूह का स्कोर 46 प्रतिशत रहा। इन परिणामों से संकेत मिलता है कि नींद की कमी के बाद थोड़ी देर की एक्सरसाइज या नैप कुछ प्रकार की याददाश्त से जुड़े प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है। हालांकि, यह निष्कर्ष सीमित संख्या में स्वस्थ वयस्कों पर किए गए प्रयोग पर आधारित है।
एक्सरसाइज और नैप दिमाग पर कैसे असर डालते हैं?
शोध में मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों की जांच के लिए EEG का इस्तेमाल किया गया। इसके निष्कर्षों से संकेत मिला कि एक्सरसाइज और नैप याददाश्त से जुड़े प्रदर्शन को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर सकते हैं। नैप लेने से मानसिक थकान कम होने और सतर्कता में सुधार होने की संभावना है। दूसरी ओर, एरोबिक एक्सरसाइज शरीर में रक्त संचार और मस्तिष्क की सक्रियता से जुड़ी प्रक्रियाओं के माध्यम से नई जानकारी को प्रोसेस करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि, इन दोनों तरीकों के प्रभाव को पूरी तरह समझने के लिए और शोध की जरूरत है। प्रयोगशाला में मिले परिणामों को रोजमर्रा की जिंदगी की हर परिस्थिति पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
याददाश्त के लिए क्यों जरूरी है पर्याप्त नींद?
नींद केवल शरीर को आराम देने का माध्यम नहीं है, बल्कि इस दौरान मस्तिष्क दिनभर मिली जानकारी को व्यवस्थित करने और यादों को मजबूत बनाने से जुड़ी प्रक्रियाओं में सक्रिय रहता है।
गहरी नॉन-REM नींद यादों को स्थिर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं, REM नींद भावनात्मक यादों और सीखने से जुड़ी प्रक्रियाओं में योगदान देती है। नींद के अलग-अलग चरण मिलकर मस्तिष्क के सामान्य कामकाज को सहारा देते हैं। लगातार पर्याप्त नींद न लेने से ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, थकान, चिड़चिड़ापन, मानसिक धुंधलापन और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
क्या छोटी नैप पूरी कर सकती है नींद की कमी?
रात में काम करने वाले लोगों या किसी कारण से कम सो पाने वालों के लिए छोटी नैप कुछ समय तक सतर्कता और कार्यक्षमता में सुधार करने में मददगार हो सकती है। वहीं, अध्ययन में 90 मिनट की नैप के बाद याददाश्त परीक्षण में बेहतर प्रदर्शन देखा गया।
लेकिन यह समझना जरूरी है कि एक्सरसाइज या नैप को रात की पर्याप्त नींद का विकल्प नहीं माना जा सकता। वयस्कों को सामान्य तौर पर हर रात 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है।
याददाश्त बेहतर रखने के लिए क्या करें?
दिमाग को बेहतर तरीके से काम करने में मदद देने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाना उपयोगी हो सकता है। इसके लिए रोजाना पर्याप्त नींद लें, अपनी क्षमता के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि करें, सोने और जागने का समय तय रखें और सोने से पहले कैफीन के सेवन तथा स्क्रीन के इस्तेमाल को सीमित करें।



