तिब्बत में गुरुवार रात आए शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई। 7 तीव्रता के भूकंप के झटकों से कई इलाकों में जान-माल का नुकसान हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। तिब्बत में महज चार घंटे के भीतर 13 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसका असर चीन के कई इलाकों के साथ पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी देखने को मिला।
4 घंटे में 13 बार आया भूकंप
तिब्बत में भूकंप का पहला झटका रात 8 बजकर 3 मिनट 42 सेकंड पर महसूस किया गया। इसके बाद रात 8:42 बजे, 9:09 बजे, 9:15 बजे, 9:47 बजे, 9:51 बजे, 10:20 बजे, 10:28 बजे, 10:40 बजे, 11:17 बजे, 11:36 बजे, 11:55 बजे और रात 12:01 बजे तक लगातार झटके महसूस किए गए।
लगातार आए भूकंप के झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम 339 मकान ढह गए हैं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान जारी है। प्रभावित और विस्थापित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।
173 किलोमीटर की गहराई में था भूकंप का केंद्र
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भारतीय समयानुसार रात करीब 8:03 बजे भूकंप आया। इसका केंद्र उत्तरी तिब्बत के नागकू शहर में, राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर था। भूकंप का केंद्र जमीन से लगभग 173 किलोमीटर की गहराई में बताया गया है।
राहत और बचाव कार्य तेज
भूकंप के बाद शिजांग में लेवल-3 आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू कर दी गई। राहत और बचाव अभियान के लिए 300 से अधिक पुलिसकर्मियों और 347 बचाव कर्मियों को तैनात किया गया है। प्रभावित बाछेन काउंटी में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। प्रशासन की ओर से मलबे में फंसे लोगों को निकालने और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने का काम जारी है।
क्यों भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है तिब्बती पठार?
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तिब्बती पठार को भूकंप की आशंका वाला संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने वाले क्षेत्र में स्थित है। इन प्लेटों की हलचल के कारण यहां भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ सकता है प्राकृतिक आपदाओं का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेजी से पिघलते ग्लेशियर और चरम मौसमी घटनाएं चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को और बढ़ा सकती हैं। हालांकि, किसी विशेष भूकंप को जलवायु परिवर्तन से सीधे जोड़ने के लिए अलग वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत होती है।
फिलहाल तिब्बत में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षा और सहायता पहुंचाने पर ध्यान दे रहा है।














