अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ एक नई न्यूक्लियर डील को मंजूरी दे दी है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के लिए इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है, हालांकि इस समझौते में कड़े सुरक्षा और सेफ्टी सिस्टम (Safety Systems) की कमी को लेकर दुनिया भर के विशेषज्ञों में गहरी चिंताएं पैदा हो गई हैं। आलोचकों का मानना है कि इस फ्रेमवर्क से यूरेनियम को हथियार बनने से रोकने वाले पर्याप्त चेक-एंड-बैलेंस मौजूद नहीं हैं।

स्टेट डिपार्टमेंट के पूर्व सीनियर अधिकारी रॉबर्ट आइन्हॉर्न ने बताया कि यह एग्रीमेंट अमेरिकी न्यूक्लियर इंडस्ट्री को बढ़ावा देने और रूस-चीन को इस मार्केट से दूर रखने में मदद कर सकता है, लेकिन जब तक इसमें एनरिचमेंट पर ज़रूरी रोक नहीं लगाई जाती, तब तक यह मिडिल ईस्ट में न्यूक्लियर प्रोलिफरेशन (प्रसार) के खतरे को काफी हद तक बढ़ा सकता है।

‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ और इंस्पेक्शन से इनकार

रिपोर्ट के मुताबिक, रियाद ने घरेलू यूरेनियम एनरिचमेंट और स्पेंड फ्यूल की रीप्रोसेसिंग को हमेशा के लिए छोड़ने वाले “गोल्ड स्टैंडर्ड” कमिटमेंट को मानने से साफ इनकार कर दिया है, जिसे पड़ोसी संयुक्त अरब अमीरात ने स्वीकार किया था। इसके अलावा, सऊदी अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र की न्यूक्लियर वॉचडॉग एजेंसी के “एडिशनल प्रोटोकॉल” को भी ठुकरा दिया है, जो कड़े सर्विलांस और वेरिफिकेशन उपायों के लिए जरूरी होता है।

अमेरिकी कंपनियों को अरबों का फायदा, रणनीतिक जोखिम बरकरार

इस समझौते के तहत आने वाले समय में अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से अरबों डॉलर मिलने का अनुमान है। समझौते के तहत वाशिंगटन और रियाद मिलकर दो साल का असेसमेंट करेंगे कि क्या किंगडम के भीतर घरेलू यूरेनियम एनरिचमेंट कमर्शियली मु मुफीद है या नहीं। यदि रिपोर्ट पॉजिटिव रही, तो अमेरिकी कंपनियां वहां एनरिचमेंट साइट तैयार करेंगी।

दूसरी ओर, फॉरेन पॉलिसी एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका ने यह डील ऐसे समय में की है जब रियाद के साथ कोई आपसी रणनीतिक छूट या इजराइल के साथ फॉर्मल रिश्ते जोड़ने की शर्त नहीं जोड़ी गई है। जानकारों का यह भी मानना है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि ईरान न्यूक्लियर हथियार हासिल करता है, तो सऊदी अरब भी पीछे नहीं रहेगा। ऐसे में, बिना कड़े सेफ्टी गार्ड्स के रियाद को न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी देना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ा जोखिम साबित हो सकता है।

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