22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। जम्मू-कश्मीर में विशेष श्रद्धांजलि सभाएं, मौन और स्मरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों और प्रशासनिक इकाइयों में भी शहीदों को नमन करने के लिए कार्यक्रम तय किए गए हैं। कई स्थानों पर मोमबत्ती मार्च और वीरता स्मरण कार्यक्रम भी आयोजित हो रहे हैं।
घाटी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
बरसी को देखते हुए कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। पर्यटन स्थलों, प्रमुख बाजारों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। ड्रोन और आधुनिक निगरानी उपकरणों से लगातार नजर रखी जा रही है। चेकिंग अभियान तेज कर दिए गए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोका जा सके।
सेना का कड़ा संदेश—भारत भूलता नहीं
पहली बरसी से पहले भारतीय सेना ने सख्त संदेश जारी करते हुए कहा कि भारत आतंक के खिलाफ अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा। सेना ने दोहराया कि जब भी देश पर हमला होता है, उसका जवाब निर्णायक तरीके से दिया जाता है। ‘भारत भूलता नहीं’ संदेश को रणनीतिक चेतावनी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर फिर चर्चा में
पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर सीमा पार आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इस ऑपरेशन में कई ठिकानों को ध्वस्त किया गया था। पहली बरसी के मौके पर इस कार्रवाई को आतंक के खिलाफ भारत की सख्त नीति के उदाहरण के तौर पर याद किया जा रहा है।














