अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अमेरिकी अदालत में एक महत्वपूर्ण शपथ पत्र दाखिल किया है। इस हलफनामे में उन्होंने उन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) द्वारा उनके खिलाफ क्रिमिनल चार्ज हटाने के पीछे कोई ‘गुप्त समझौता’ या ‘डील’ थी।

क्या है पूरा मामला?

न्यूयॉर्क की अदालत ने 8 जुलाई को एक आदेश जारी कर गौतम अदाणी से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या उन्हें चार्ज खारिज होने के पीछे किसी वादे, ऑफर या समझौते की जानकारी है। इसके जवाब में अदाणी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी लेनदेन या सौदेबाजी का कोई ज्ञान नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चार्ज हटाने के बदले न तो उन्होंने कोई पेशकश की और न ही कोई कीमती चीज का लेन-देन हुआ।

निवेश और केस का क्या संबंध?

अदाणी ग्रुप ने अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा 13 नवंबर 2024 को की थी, जो कि इंडिक्टमेंट (आरोप पत्र) खुलने से पहले ही सार्वजनिक की जा चुकी थी। अदाणी के कानूनी सलाहकारों ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक जरूर की थी, जिसमें प्रस्तावित निवेश का जिक्र हुआ था, लेकिन DoJ ने स्पष्ट किया कि केस खारिज करने के फैसले में इस निवेश का कोई लेना-देना नहीं था।

क्यों खारिज हुआ केस?

अमेरिकी न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आर ट्रेंट मैककॉटर ने अदालत को बताया कि यह केस कानूनी रूप से ‘अपरिहार्य’ था। विभाग का मानना था कि कथित अनियमितताएं काफी हद तक भारत केंद्रित थीं, इनमें किसी इन्वेस्टर को नुकसान नहीं हुआ था और मामले से जुड़े अधिकतर सबूत भारत में थे। इसके अलावा, विदेशी भ्रष्टाचार अधिनियम (FCPA) के तहत ये आरोप अब ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं थे।

अदाणी ग्रुप को झटका और राहत

नवंबर 2024 में लगे आरोपों के बाद अदाणी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई थी, जिससे निवेशकों को करीब 2.85 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। हालांकि, अब न्याय विभाग द्वारा खुद केस खारिज करने की मांग करना ग्रुप के लिए बड़ी राहत है।

इस शपथ पत्र के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि अमेरिकी अदालत इस मामले में अंतिम फैसला जल्द सुनाएगी। गौतम अदाणी का यह हलफनामा न केवल उनके ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज करता है, बल्कि अमेरिकी कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता को भी एक बार फिर से सुर्खियों में ले आया है।

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