देहरादून: उत्तराखंड के हरिद्वार और देहरादून जिलों में आतंक का पर्याय रहे कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि और उसके आपराधिक सिंडिकेट से जुड़े मामलों में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। गैंगस्टर की मदद करने और अपने पद का दुरुपयोग कर एक विधवा महिला की भूमि पर कब्जा कर उसे फर्जी तरीके से बेचने के आरोप में गिरफ्तार किए गए पूर्व पुलिस कांस्टेबल शेर सिंह को माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल से जमानत मिल गई है। आरोपी शेर सिंह 7 नवंबर 2025 को जेल से बाहर आ चुका है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि वर्तमान में विभिन्न संगीन मामलों में सजा काट रहा है। उसके द्वारा संचालित गैंग में मनीष बॉलर, शेर सिंह और हसन अब्बास जैदी जैसे लोग शामिल थे। आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर रुड़की की एक विधवा महिला के भाई और देवर पर जानलेवा हमला करवाया था, जिसके डर से पीड़िता को अपने बच्चों के साथ शहर छोड़कर भागना पड़ा था। इसी दौरान अभियुक्तों ने उसकी जमीन पर कब्जा कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए उसे बेच दिया।
मामले की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि जब शेर सिंह उत्तराखंड पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात था, तब उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सितारगंज जेल और रुड़की कोर्ट में कुख्यात प्रवीण वाल्मीकि से कई बार मुलाकात की। उसने पीड़िता पर मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया और उसे धमकाया। इस मामले में थाना गंगनहर (हरिद्वार) में विभिन्न गंभीर धाराओं (जैसे धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने 15 सितंबर 2025 को शेर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जिसे अब हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है।














