मेघालय: मेघालय की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। कभी राज्य की राजनीति में किंगमेकर की भूमिका निभाने वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) इस समय बड़े राजनीतिक संकट से जूझ रही है। पार्टी में हुई बगावत के बाद उसके 12 में से 11 विधायकों ने साथ छोड़ दिया है। इनमें से 8 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए हैं, जबकि 3 विधायकों ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) का दामन थाम लिया है।

विधायकों के पार्टी छोड़ने का असर अब UDP के शीर्ष नेतृत्व पर भी दिखाई देने लगा है। पार्टी अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री मेटबाह लिंगदोह ने मुख्यमंत्री कोनराड संगमा के नेतृत्व वाली मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (MDA) सरकार से इस्तीफा दे दिया है।

अकेले पड़े मेटबाह लिंगदोह ने छोड़ा मंत्रिमंडल

UDP में बड़ी टूट के बाद पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह ने शनिवार को कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। वह विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

मेटबाह लिंगदोह ने इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा कि जब उनकी अपनी पार्टी के 11 विधायक साथ छोड़ चुके हैं और सदन में वह अकेले विधायक बचे हैं, तो ऐसे राजनीतिक हालात में कैबिनेट मंत्री बने रहना नैतिक रूप से उचित नहीं है।

उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री कोनराड संगमा को सौंप दिया है, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के भविष्य को लेकर आगे भी बड़े फैसले लिए जाने के संकेत दिए हैं।

12 में से 11 विधायकों ने छोड़ी UDP

मेघालय की राजनीति में इस घटनाक्रम ने सभी को चौंका दिया है। UDP के कुल 12 विधायकों में से 11 ने पार्टी छोड़ दी है।

  • 8 विधायक बीजेपी में शामिल हुए।
  • 3 विधायक मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की NPP में शामिल हुए।
  • पार्टी के अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह अब सदन में UDP के इकलौते विधायक बचे हैं।

इस टूट के बाद राज्य में UDP की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो गई है।

2023 में जीती थीं 12 विधानसभा सीटें

बता दें कि 2023 के विधानसभा चुनाव में UDP ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 12 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी खासी-जयंतिया हिल्स क्षेत्र की सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टी बनकर उभरी थी।

लेकिन महज तीन साल के भीतर पार्टी में हुई बगावत ने उसके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब मेघालय की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य के अन्य राजनीतिक दल इस बदलाव के बीच अपनी रणनीति किस तरह तय करते हैं।

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