हाल ही में फॉरेन अफेयर्स एक्सपर्ट रोबिंदर सचदेव ने ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत पर चिंता जताई। उनका कहना था कि यदि यह बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के जारी रहती है तो एक और सैन्य हमले की संभावना बढ़ सकती है। सचदेव ने मीडिया से बातचीत में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची द्वारा किए गए ताज़ा यात्रा के बारे में भी महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं।

बता दें, सचदेव ने कहा, “अगर यह बातचीत बिना किसी प्रगति के लंबे समय तक चलती रही, तो ईरान पर एक और हमले की संभावना काफी बढ़ जाएगी। अमेरिका, विशेष रूप से राष्ट्रपति ट्रंप, ऐसे दबाव में हैं कि वे किसी बड़े कदम के बिना इसे खत्म नहीं करना चाहते। नेतन्याहू जैसे नेता अमेरिकी सरकार को हमले के लिए उकसा सकते हैं।” उनका मानना है कि यह समय तूफान से पहले की शांति हो सकती है और हमें आने वाले दिनों में बड़े हमलों की आशंका है।

ईरान की कूटनीति और रूस के साथ रिश्ते
सचदेव ने कहा कि ईरान ने हाल के दिनों में रूस, पाकिस्तान और ओमान जैसे देशों से संपर्क किया है, जो उसकी कूटनीति का हिस्सा बन रहे हैं। उनका कहना था, “ईरान का विदेश मंत्री हाल ही में पाकिस्तान और ओमान गया है, और अब रूस का दौरा किया है। इन यात्राओं से स्पष्ट होता है कि ईरान अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए रूस के साथ अपने रिश्ते को और प्रगाढ़ कर रहा है।” सचदेव ने यह भी बताया कि रूस ने पहले ईरान से बड़े पैमाने पर यूरेनियम एयरलिफ्ट किया था, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंध मजबूत हुए थे।

उन्होंने कहा, “रूस की भूमिका अब तक पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से रूस ने ईरान के साथ हुए न्यूक्लियर डील में अहम भूमिका निभाई थी। इस डील के दौरान रूस ने ईरान से लगभग 12.5 टन यूरेनियम एयरलिफ्ट किया था। इसके अलावा, ईरान और रूस के बीच आगामी संबंधों में सैन्य और रणनीतिक सहयोग की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।”

यूरेनियम पर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष
सचदेव ने बताया कि अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता ईरान के पास मौजूद यूरेनियम है। उनका कहना था, “अमेरिका को ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम चाहिए, ताकि वह अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत कर सके। ट्रंप प्रशासन ईरान के यूरेनियम को ‘ट्रॉफी’ के रूप में हासिल करना चाहता है, ताकि वह इसे अपने सफलता के रूप में पेश कर सके। लेकिन ईरान यूरेनियम देने के लिए तैयार नहीं है। अगर उन्होंने ऐसा किया, तो यह आत्मसमर्पण जैसा होगा।”

ईरान का प्रस्ताव: होर्मुज स्ट्रेट और मिसाइल प्रोग्राम
सचदेव ने बताया कि ईरान ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए अमेरिका से होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर बात की है। उनका कहना था, “ईरान का कहना है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका को अपनी नाकाबंदी हटानी होगी। यदि अमेरिका नाकाबंदी हटा देता है, तो शिपिंग फिर से शुरू हो सकती है और दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।” सचदेव ने यह भी बताया कि ईरान का मिसाइल प्रोग्राम एक बड़ा मुद्दा है और वह इस मामले में भी कई मांगें कर रहा है।

सचदेव ने यह कहा कि इन सब घटनाओं से ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत का भविष्य और भी जटिल होता जा रहा है। अमेरिकी सरकार की नीतियों में बदलाव, रूस का बढ़ता प्रभाव और ईरान के रणनीतिक कदम, इन सबका असर आने वाले समय में दुनिया की राजनीति पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की “रेड लाइन्स” की एक लिस्ट हाल ही में पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को दी गई है, जो आने वाले दिनों में अहम हो सकती है।

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